Paper Leak Bill: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक साल 2024 में लाए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम में संशोधन है। उन्होंने कहा कि यह कानून भी मौजूदा सरकार ही लेकर आई थी और स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला कानून था। पहले लाया गया कानून और अब प्रस्तुत किया गया संशोधन, दोनों ही छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के बच्चों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा, इस दृष्टि से यह संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होने वाला कानून है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस काल में अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे, लेकिन शायद उस तरह की कार्यवाही नहीं की गई जैसी अब की जा रही है। उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती पेपर लीक से 2012 के एम्स एंट्रेस पेपर लीक तक, कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक गिनाए और कहा कि इसीलिए सोचा गया कि अब इसे लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए। भारत में अभी चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं। 1992 में जब सरकार कांग्रेस की थी, एक कमेटी ने सुझाव दिया था केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसा ही सुझाव दिया था।
पहली बार 2024 में यह बिल लाया गया, जून 2024 में लागू किया गया। इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 2024 के बिल को और मजबूत करने की जरूरत है, हम इसी कानून में संशोधन के लिए बिल लाए हैं।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान इस संशोधन विधेयक के जरिए कर रही है। पूरी जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की समयसीमा तय की गई है, जबकि इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा। घटना होने से लेकर अंतिम निर्णय आने तक पूरे मामले के निपटारे में पांच महीने से अधिक समय नहीं लगेगा। यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही, ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में डबल बेंच से नीचे नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार एक महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है और उसकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक पेश करने के साथ ही कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठित और राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख सिफारिशों में से 35 को पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह ईमानदार है और यह संशोधन भी उसी दिशा में किया गया एक गंभीर प्रयास है। उनका कहना था कि इन प्रस्तावों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए और यदि कोई विरोध करता है, तो उस पर देश की जनता सवाल उठाएगी.