Mineral Processing Park: केंद्र सरकार की चार राज्यों में महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण पार्क स्थापित करने की योजना

Mineral Processing Park: सरकार गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए चार समर्पित पार्क स्थापित करने की योजना बना रही है। इनका उद्देश्य बैट्री में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख खनिजों के प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों को तेजी से बढ़ावा देना है।

खान सचिव केशव चंद्रा ने बताया कि इन पार्कों में अलग-अलग खनिजों पर आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी विकसित की जाएंगी, इनमें से कुछ पार्क लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान देंगे। बैट्री क्षेत्र के लिए इन दोनों खनिजों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बाद अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम लिथियम और निकेल पर तेजी से काम कर रहे हैं, क्योंकि ये बैट्री क्षेत्र के लिए अहम हैं।वैश्विक स्तर पर भविष्य की वृद्धि के लिए बैट्री सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है।’’ चंद्रा ने कहा कि सरकार इन दोनों खनिजों के लिए जल्द ही उपाय पेश करेगी और इनके लिए निर्धारित पार्कों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पार्क में किसी एक निर्धारित खनिज के प्रसंस्करण से लेकर उससे जुड़े आगे के उद्योगों तक पूरी मूल्य शृंखला विकसित की जाएगी, ताकि एक ही स्थान पर उसका अधिकतम मूल्यवर्धन हो सके।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि इन खनिज प्रसंस्करण पार्कों की योजना और क्रियान्वयन राज्य सरकारें करेंगी, जबकि केंद्र उन्हें पूरा तकनीकी सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों को सहयोग के लिए पहले ही पत्र लिख चुकी है। सरकार ने इससे पहले राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी थी। इसके तहत सात साल में कुल 34,300 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करना और हरित ऊर्जा की तरफ भारत के बदलाव को गति देना है।

एनसीएमएम के लिए सरकार ने 16,300 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से 18 हजार करोड़ रुपये का योगदान मिलने की उम्मीद है। मिशन के तहत देश के जमीनी और समुद्री क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा दिया जाएगा। तांबा, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा जैसे महत्वपूर्ण खनिज स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए जरूरी कच्चा माल हैं। इनका इस्तेमाल पवन चक्की, बिजली नेटवर्क, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण सहित कई क्षेत्रों में होता है।

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