INDIA: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली को लेकर विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नकारात्मकता, हंगामा और संसद की कार्यवाही बाधित करने की राजनीति करने वालों को सत्ता से दूर ही रहना पड़ेगा।
दिल्ली में विपक्ष की रैली के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए गए सवालों के बीच अमित शाह ने विपक्ष को घेरा, उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही में बाधा डालना, झूठ फैलाना, अव्यवस्था पैदा करना और संसदीय मुद्दों को सड़कों पर ले जाकर हंगामा करना विपक्ष की राजनीति का हिस्सा बन गया है। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर विपक्ष इसी तरह अपनी राजनीति करता रहा तो उसे अगले पांच साल भी विपक्ष में बैठने के लिए तैयार रहना चाहिए।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने के अपने बेटे के सपने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पिछले 15 वर्षों से लगातार चुनावी हार का सामना कर रहे हैं और सोनिया गांधी का उन्हें प्रधानमंत्री बनाने का सपना अब तक पूरा नहीं हो पाया है। शाह ने विपक्ष की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो वे जीवनभर मॉक पार्लियामेंट करते रहें, क्योंकि उनके प्रधानमंत्री बनने की बारी कभी नहीं आने वाली।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद की कार्यवाही बाधित करके महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने की राह में रुकावट डाल रहे हैं। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश की मातृशक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के अपने संकल्प पर कायम है। गृह मंत्री ने INDIA गठबंधन की रैली की तारीख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के सीजन में दिल्ली के व्यापारियों ने विपक्षी दलों से रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की अपील की थी, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।
शाह के मुताबिक, व्यापारियों ने अपनी परेशानी को लेकर तीन बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की, विपक्षी नेताओं को पत्र लिखे और रैली की तारीख बदलने का आग्रह किया। व्यापारियों का कहना था कि दिवाली का सप्ताह उनके सालभर के कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। मिठाइयों और पटाखों का स्टॉक नहीं बिकने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने रैली की तारीख को 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी से जोड़ते हुए भी विपक्ष की आलोचना की। शाह ने कहा कि जिस दिन सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा की दर्दनाक घटना हुई थी, उसी दिन रैली आयोजित करना उचित नहीं था। दिल्ली के व्यापारियों का हवाला देते हुए अमित शाह ने कांग्रेस पर एक और राजनीतिक हमला किया। उन्होंने कहा कि राजधानी के छोटे व्यापारियों ने पिछले तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं जीतने दी और आने वाले तीन चुनावों में भी पार्टी को कोई सीट नहीं मिलने का दावा किया।
2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य
अपने संबोधन में अमित शाह ने देश में नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक पूरे देश को नशे की समस्या से मुक्त करना है। इसमें पंजाब को भी शामिल किया गया है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने, नक्सलवाद के खात्मे और तीन तलाक की प्रथा समाप्त किए जाने को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में गिनाया। गृह मंत्री ने दोहराया कि सरकार 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब समेत पूरे देश को नशे के खतरे से पूरी तरह मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।