BRICS में स्थानीय मुद्राओं और सीमा-पार भुगतान पर जोर, भारत की अगुवाई में वित्तीय एजेंडा आगे बढ़ा

BRICS देश सीमा-पार भुगतान, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन, विकास वित्त और वित्तीय मजबूती के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत की 2026 की अध्यक्षता में BRICS के वित्तीय ट्रैक के तहत सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यावहारिक वित्तीय एकीकरण की नींव तैयार की जा रही है।

BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के संयुक्त बयान के अनुसार, समूह सीमा-पार भुगतान की इंटरऑपरेबिलिटी पर काम जारी रखेगा। साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में बिखराव, संरक्षणवाद और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक मजबूती बढ़ाने के लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक 12-13 अगस्त को जयपुर और 10 सितंबर को मुंबई में हुई। सदस्यों ने कहा कि BRICS के विस्तारित सदस्य समूह ने इसकी विविधता और प्रतिनिधित्व को और मजबूत किया है। उन्होंने “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम के तहत आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

संयुक्त बयान में कहा गया कि BRICS देश तेज, कम लागत वाले, अधिक सुलभ, कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित सीमा-पार भुगतान के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशते रहेंगे। इसमें भुगतान और मैसेजिंग चैनलों की इंटरऑपरेबिलिटी तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

समूह ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। BRICS ने NDB से संसाधन जुटाने, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण बढ़ाने, फंडिंग के स्रोतों में विविधता लाने और समावेशी एवं सतत विकास में योगदान देने वाली उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं को समर्थन देने का आग्रह किया। इसके अलावा, BRICS ने BRICS Multilateral Guarantees Initiative में हुई प्रगति का स्वागत किया। समूह ने कहा कि यह पहल निजी पूंजी जुटाने, विकास परियोजनाओं की ऋण क्षमता में सुधार करने और BRICS तथा ग्लोबल साउथ में वित्तपोषण की लागत कम करने में मदद कर सकती है।

भारत की अध्यक्षता में सीमा शुल्क के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाया गया। पहली BRICS Joint Customs Enforcement Operation और Customs Mutual Administrative Assistance Agreement की दिशा में चल रहे कार्य का उल्लेख करते हुए सदस्यों ने कहा कि सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान और सहयोग से व्यापार सुगमता तथा प्रवर्तन को मजबूत किया जा सकता है। संयुक्त बयान में वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग को भी रेखांकित किया गया। BRICS देशों ने AI पर नीति संवाद जारी रखने का समर्थन किया और इसके साथ नियामकीय निगरानी तथा AI के नैतिक, जिम्मेदार और सुरक्षित इस्तेमाल पर जोर दिया।

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