Agriculture: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक ही जमीन पर सौर ऊर्जा उत्पादन और फसल की खेती करने की ‘एग्रीवोल्टाइक्स’ तकनीक की वकालत की। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस तकनीक को अपनाने से कृषि उत्पादन में कमी नहीं आनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सातवीं ‘एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस’ को संबोधित करते हुए, मंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं से कहा कि इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कोई भी नीति बनाने से पहले, इससे जुड़ी सभी व्यावहारिक समस्याओं पर विचार कर लें।
चौहान ने कहा, “हमें अपनी आबादी का पेट भरने के लिए अनाज और अन्य फसलों की जरूरत है। साथ ही, भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए हमें बिजली की भी आवश्यकता है। एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक के जरिए, एक ही जमीन से बिजली और फसल, दोनों का उत्पादन किया जा सकेगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एग्रीवोल्टाइक्स के कारण कृषि उत्पादन में कोई गिरावट नहीं आनी चाहिए।
मंत्री ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स से किसानों को अतिरिक्त आय हो सकती है और ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि चौहान ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स को बढ़ावा देने के लिए कोई भी नीति या योजना बनाने से पहले इससे जुड़ी सभी संभावित व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों और सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जमीन के स्वामित्व, मिट्टी की सेहत और फसल पैटर्न का अध्ययन करें, ताकि एग्रीवोल्टाइक्स को अपनाने के लिए अलग-अलग मॉडल तैयार किए जा सकें।
चौहान ने कुछ ऐसी समस्याओं का जिक्र किया जिनका सामना किसानों को करना पड़ सकता है, जैसे कि खेतों में लगे सोलर पैनलों के बीच ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनों को चलाना और बारिश के पानी का प्रबंधन करना। उन्होंने कहा कि नीति बनाते समय अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक स्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा, “मॉडल ऐसा होना चाहिए जो छोटे किसानों के खेतों में सफल हो सके और इससे फसल उत्पादन में भी कोई कमी न आए।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तकनीक को बढ़ावा देने में ‘किसान उत्पादक संगठन’ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चौहान ने भरोसा दिलाया कि उनका मंत्रालय, इस तकनीक को सफल बनाने के लिए ‘नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय’ को पूरा सहयोग देगा।