Sugar price: इस साल त्योहारों के सीजन से पहले लोगों को अलग चिंता सता रही है, चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। इससे लोगों के माथे पर शिकन आने शुरू हो गए हैं, त्योहारों की मिठास पहले से फीकी पड़नी शुरू हो गई है।
चीनी की कीमतें दो हफ्ते से भी कम समय में 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गईं। देश के कुछ हिस्सों में तो इसकी कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है, रक्षाबंधन और दूसरे त्योहारों के दौरान इसकी मांग बढ़ जाती है। व्यापारियों को भय है कि त्योहारी सीजन से पहले कीमतें और बढ़ सकती हैं।
छोटे दुकानदार भी परेशान हैं, उनका कहना है कि दूसरे जरूरी सामानों की कीमतें भी बढ़ने लगी है। इससे दाम पर काबू रखना मुश्किल होता जा रहा है, सरकार ने उन दावों को खारिज किया कि इथेनॉल बनाने में गन्ने के ज्यादा इस्तेमाल से कीमतें बढ़ रही हैं। सरकार ने इंडस्ट्री को कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
सरकार ने यह भी कहा कि 2025-26 मार्केटिंग साल के लिए चीनी का उत्पादन घटकर 306 लाख टन रह गया है, जो पहले 343 लाख टन होने का अनुमान था। इसकी मुख्य वजह गन्ने की फसल में बीमारियां लगना और ज्यादा बारिश के कारण खेतों में पानी भरना है। चीनी का मार्केटिंग साल अक्टूबर से सितंबर तक होता है।
जानकारों का कहना है कि बेशक घरेलू मांग लगभग 290 लाख टन है और उत्पादन में कमी आई है, फिर भी भारत खपत से ज्यादा चीनी का उत्पादन कर रहा है। हालांकि उनका ये भी कहना है कि त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण कीमतें और बढ़ सकती हैं, उधर खरीदारों का कहना है कि खाने-पीने के जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी घरेलू बजट को बिगाड़ रही है।
सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति देने का ऐलान किया है। खुले बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता के लिए डीलरों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट लगाए जा रहे हैं। इनमें सॉफ्ट-ड्रिंक और आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। त्योहारी सीजन नजदीक है। इस कारण, चीनी और मिठाइयों की मांग और बढ़ सकती है। फिलहाल, खरीदारों को लग रहा है कि इस साल वो समय भी कड़वाहट भरा होगा, जो पारंपरिक रूप से सबसे मीठा समय माना जाता है।