Janmashtami: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव, यानी कृष्ण जन्माष्टमी का उत्तर प्रदेश के मथुरा में खास महत्व है, क्योंकि पारंपरिक रूप से इसे ही उनकी जन्मस्थली माना जाता है। सांप्रदायिक सद्भाव की एक बेहतरीन मिसाल यह है कि हर साल भगवान कृष्ण की मूर्ति को सजाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुकुट, अन्य आभूषण और वस्त्र मुस्लिम कारीगर ही बनाते हैं।
इनमें से कई कारीगर पीढ़ियों से यह काम कर रहे हैं और अब उनके परिवारों के युवा भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कारीगर मोहम्मद इकबाल ने बताया कि “जैसी कृष्ण को पसंद आ जाती है वही पोशाक हमारे यहां चढ़ती है मतलब कृष्ण जी पर और कृष्ण जी पर चढ़ाते ही कृष्ण जी मतलब समझ लो बस अपने पूरा उन पर भाव ऐसा आता है कि हकीकत में ही नीचे ही भगवान उतर आए हैं। तो ये हमारे बहुत बड़े भाग्य हैं जो हम मतलब कि हम मोमडन होकर और इसको हम बनाते हैं और पांच पीढ़ी से हमारा काम होता हुआ आ रहा है और हमारे बच्चे भी करते हैं, हमारे नाती वगैरह ये सब अब भी काम कर रहे हैं।”
कारीगर इन शानदार सजावटी चीजों को बनाने में बहुत गर्व महसूस करते हैं। वे हर एक चीज पूरी तरह से हाथ से बहुत बारीकी से बनाते हैं। हर साल, वे श्रद्धालुओं की बदलती जरूरतों के हिसाब से नए डिजाइन बनाते हैं। इससे इस खास परंपरा को आगे बढ़ने में मदद मिलती है, साथ ही इसकी कलाकारी और कारीगरी भी बरकरार रहती है।
कारीगर ने कहा कि मोहम्मद अफजल “पोशाक में तो देखिए केसरी येलो वाला कलर ये ज्यादा चल रहा है और पगड़ियां भी बन रही हैं और मल्टी और वाइट में ज्यादा चल रही हैं मेरे पास। जितने भी ऑर्डर हैं ज्यादातर वाइट में आ रहे हैं। हम मुस्लिम होकर देखो हमारे हाथ से चढ़े हुए मुकुट, श्रृंगार वगैरह वो कृष्ण को चढ़ रहे हैं। तो इससे बड़ी खुशनसीबी और क्या है हमारी।”
मथुरा में 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। शहर भर के मंदिरों में भगवान कृष्ण की मूर्तियों पर श्रद्धालु जो सजावट देखेंगे, उनमें से कई चीजें मुस्लिम कारीगरों के हाथों से तैयार की गई होंगी। ये इस बात का सबूत होगा कि कारीगर पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।