इसरो का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा- ISRO

ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि न तो इसका निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा। एक्स पर एक पोस्ट में, अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसरो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अगली पीढ़ी पर मजबूती से ध्यान केंद्रित कर पाता है, जबकि इंडस्ट्री परिपक्व तकनीकों और क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करती है।

ये घटनाक्रम तब हुआ जब इसरो के नौ कर्मचारी संघों ने चार सितंबर को अंतरिक्ष एजेंसी के चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखकर, इसके वनिर्माण और संचालन कामों को निजी संस्थाओं को सौंपने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा। वे 21 अगस्त को इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर के अध्यक्ष पवन गोयनका की टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे।

इसरो ने पोस्ट में कहा, “उन क्षेत्रों में इसकी भूमिका धीरे-धीरे मजबूत होगी जहां इसकी वैज्ञानिक विशेषज्ञता सबसे ज्यादा मायने रखती है: जैसे कि अत्याधुनिक आर एंड डी, एडवांस्ड तकनीक, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी के लॉन्च सिस्टम, डीप-स्पेस और ग्रहों के मिशन और रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमताएं।” अंतरिक्ष एजेंसी ने आगे कहा कि वह अत्याधुनिक तकनीकें विकसित करना जारी रखेगी, जिसमें कम्युनिकेशन, नेविगेशन और पृथ्वी के अवलोकन के लिए एडवांस्ड पेलोड, सेंसर, प्रोपल्शन सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल हैं।

इसरो ने कहा, “इस बीच, परिपक्व और नियमित रूप से बनने वाले सिस्टम को इंडस्ट्री के जरिए बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है। परिपक्व लॉन्च व्हीकल, नियमित सैटेलाइट और अन्य स्थापित सिस्टम का उत्पादन इंडस्ट्री या पीएसयू द्वारा उचित प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा सकता है।” इससे अगली पीढ़ी की तकनीक और मिशन के लिए ज्यादा संसाधन और वैज्ञानिक मैनपावर लगाने में मदद मिलेगी। इनमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाना, 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय क्रू वाला मिशन भेजना, अगली पीढ़ी के और दोबारा इस्तेमाल होने वाले लॉन्च सिस्टम बनाना, लगातार चंद्रमा और ग्रहों की खोज करना, और भारत को एक बड़ी ग्लोबल स्पेस पावर के तौर पर स्थापित करना शामिल हैं।

बता दें कि इन स्पेस, अंतरिक्ष विभाग के तहत एक स्वायत्त एजेंसी है जो गैर-सरकारी संस्थाओं की अलग-अलग स्पेस गतिविधियों को बढ़ावा देती है, उन्हें सक्षम बनाती है, मंजूरी देती है और उनकी निगरानी करती है। गोयनका ने कहा था कि आखिरकार, इसरो कोई लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और निजी सेक्टर या पीएसयू ऐसा करेंगे। कर्मचारी संगठनों का दावा था कि इन बयानों के साथ अंतरिक्ष विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी, जिसमें मंजूर की गई पॉलिसी, उसके कानूनी और प्रशासनिक आधार, उसके चरणों या मौजूदा वर्कफोर्स और भविष्य की सरकारी भर्ती पर उसके असर के बारे में बताया गया हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *