Ganga Dussehra: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, ब्रह्ममुहूर्त से ही हर की पैड़ी और आसपास के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी हुई है।देशभर से पहुंचे भक्त मां गंगा की पावन धारा में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर रहे हैं। पूरे घाट क्षेत्र में “हर-हर गंगे” और “जय माँ गंगे” के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो उठा है।
स्नान के बाद श्रद्धालु दीपदान, विशेष पूजा और दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। हरिद्वार के सुभाष घाट, कुशा घाट, चंडी घाट, कनखल का राजघाट, दक्षेश्वर महादेव मंदिर घाट और शीतला माता मंदिर घाट पर भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है।
त्रिवेणी संगम पर आस्था का महासंगम
संगम नगरी प्रयागराज में भी गंगा दशहरा के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। त्रिवेणी संगम पर भोर से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं।गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर लाखों श्रद्धालु स्नान कर पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर रहे हैं। साधु-संतों की मौजूदगी और ‘हर हर गंगे’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है।
प्रयागराज में संगम तट का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां माघ मेला, मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर भी आस्था का ऐसा ही विशाल समागम देखने को मिलता है।
क्यों खास है गंगा दशहरा?
गंगा दशहरा मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पावन पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलकर भगवान विष्णु के चरणों को स्पर्श करते हुए भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण इस दिन स्नान का विशेष महत्व है।
रक्षा के कड़े इंतजाम
गंगा दशहरा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। हरिद्वार और प्रयागराज दोनों ही शहरों में भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। घाटों और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुचारु रूप से स्नान एवं पूजा कर सकें।