Assam:मशहूर ‘बिहू पेपा’ की खास आवाज सदियों से असम के गांवों में गूंजती रही है। ये त्योहारों के जश्न और राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक और बिहू उत्सव की पहचान माने जाने वाले पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र ‘बिहू पेपा’ को अब जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि से राज्य की सदियों पुरानी लोक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।
‘बिहू पेपा’ की मधुर और विशिष्ट ध्वनि वर्षों से असम के गांवों और त्योहारों में गूंजती रही है। पारंपरिक रूप से भैंस के सींग और बांस से तैयार किए जाने वाले इस वाद्ययंत्र को स्थानीय कारीगर बेहद बारीकी और पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकों के माध्यम से हाथों से बनाते हैं।
जीआई टैग मिलने की घोषणा के बाद गोलाघाट समेत कई क्षेत्रों में कारीगरों और लोक कलाकारों ने खुशी जताई। उनका कहना है कि यह सम्मान न केवल इस अनूठी कला और परंपरा के संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को भी ‘बिहू पेपा’ सीखने और इससे जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।
कारीगरों का मानना है कि जीआई टैग से इस लोक वाद्ययंत्र की पहचान वैश्विक स्तर तक पहुंचेगी और इससे जुड़े कलाकारों व शिल्पकारों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे।