UCC Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे राज्य के लोगों के लिए “स्वर्णिम अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक कानून देश के मूल सिद्धांत ‘एक देश, एक संविधान, एक ध्वज, एक नेता’ को और मजबूत करता है। कांग्रेस विधायकों के विरोध और विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग के बावजूद इसे ध्वनिमत से पारित किया गया। कांग्रेस विधायकों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण की मांग भी उठाई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कानून को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह डॉ. भीमराव आंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राष्ट्रनायकों की विचारधारा से प्रेरित है। उन्होंने कहा, “समान नागरिक संहिता विधेयक का पारित होना मध्य प्रदेश के 8.5 करोड़ लोगों के लिए वास्तव में स्वर्णिम दिन है। मध्य प्रदेश विधानसभा में इस कानून का पारित होना ‘एक देश, एक संविधान, एक ध्वज, एक नेता’ के विजन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
सीएम यादव ने कहा कि यह कानून महिलाओं को बहुविवाह से होने वाली परेशानियों से मुक्ति दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सरकारी समर्थन सुनिश्चित करने में मदद करेगा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि वह हमेशा हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश क्यों करती है। यादव ने कहा कि कांग्रेस की इसी सोच के कारण आजादी के समय देश का विभाजन हुआ था।
यह कानून राज्य में सभी धार्मिक समुदायों के बीच व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक समान और एकीकृत नागरिक कानूनी व्यवस्था स्थापित करता है। वहीं, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने UCC को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य और देश के युवा समान नागरिक संहिता नहीं, बल्कि समान शिक्षा संहिता और समान स्वास्थ्य संहिता चाहते हैं।
उन्होंने मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या मुख्यमंत्री को देशभर में UCC लागू करने को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, जो वह इसे यहां लागू कर रहे हैं?” कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी विधानसभा में UCC विधेयक पारित किए जाने की आलोचना की और आरोप लगाया कि संवैधानिक और संसदीय नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि संशोधन पर चर्चा हुई और उन्हें अपने प्रस्ताव रखने का अवसर भी दिया गया, लेकिन दो घंटे बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकार केवल विधेयक को पारित कराने पर अड़ी हुई है।
वहीं, राज्य सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून समानता सुनिश्चित करेगा, महिलाओं को उत्पीड़न से बचाएगा और समाज में चली आ रही प्रतिगामी प्रथाओं को खत्म करेगा। सारंग ने कहा, “मध्य प्रदेश में अब महिलाओं को अत्याचार या उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोई पुरुष चार शादियां नहीं कर सकेगा और ‘हलाला’ जैसी प्रतिगामी प्रथाओं का अंत होगा। राज्य में समानता और एकरूपता कायम होगी।” उन्होंने आगे कहा कि यह कानून समुदाय से परे सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित करता है और राज्य को एक समान नागरिक व्यवस्था की दिशा में देश के व्यापक प्रयासों के अनुरूप आगे बढ़ाता है।