Indore: मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में कथित तौर पर दूषित पानी पीने के बाद वहां उल्टी और दस्त के मामलों में अचानक वृद्धि देखी गई है। इलाके के दवाखानों के मालिकों का कहना है कि रोजाना पांच से दस मरीज उल्टी, चक्कर और दस्त की शिकायत लेकर फार्मेसियों में आ रहे हैं।
भागीरथपुरा के एक दवाखाने के मालिक शुभम यादव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उल्टी और दस्त से संबंधित दवाओं की खपत में पांच से दस फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, “हर दिन पांच से दस मरीज उल्टी और चक्कर जैसे लक्षणों के साथ आते हैं। संबंधित दवाओं की बिक्री बढ़ गई है।”
मरीजों का कहना है कि पानी का दूषित होना इसका मुख्य कारण है। स्थानीय निवासी कमलेश साहू ने बताया कि उन्हें लगभग आठ से दस दिनों तक लगातार उल्टी और पेट दर्द रहा। उन्होंने कहा, “मेरे बच्चों को भी पेट दर्द और चक्कर आ रहे थे। हमने दवाखाने से दवा ली और अब हम बेहतर महसूस कर रहे हैं।”
सैकड़ों निवासियों के बीमार पड़ने के बाद स्थिति चिंताजनक हो गई, जिसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित मरीजों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की। इसके बाद जिला प्रशासन ने मुफ्त चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था की, जिसमें भागीरथपुरा की चिकित्सा टीमों और स्थानीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर ने मुफ्त ओआरएस, निर्जलीकरण रोधी घोल और आवश्यक दवाएं वितरित कीं।
सरकार ने बीते शुक्रवार को वकील रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के जवाब में उच्च न्यायालय के समक्ष 40 पन्नों की स्थिति रिपोर्ट पेश की। सरकार ने कहा कि दूषित जल आपूर्ति के कारण फैले दस्त के प्रकोप पर अब प्रभावी नियंत्रण पा लिया गया है और किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पल-पल की निगरानी की जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रकोप शुरू होने के बाद से विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 294 रोगियों में से 93 रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज करके उन्हें छुट्टी दे दी गई है। शेष 201 रोगियों में से 32 आईसीयू में भर्ती हैं।