Monsoon session: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसद के आगामी मानसून सत्र की शुरुआत से पहले तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत के मामलों पर फैसला करेंगे। इन दलों ने अपने बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल के नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और पार्टी से अलग हुए समूह से मुलाकात कर उनकी बातें सुनीं।
इसी प्रकार की प्रक्रिया शिवसेना (यूबीटी) के मामले में भी अपनाई गई।उन्होंने बताया कि संसद के विधि एवं संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श जारी है तथा उनके सुझावों के आधार पर अध्यक्ष अंतिम निर्णय लेंगे। सूत्रों ने कहा कि इसी तरह के मामलों में पीठासीन अधिकारियों द्वारा पहले लिये गए फैसलों और नजीर का भी अध्ययन किया जा रहा है, ताकि सभी संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विचार कर कानूनी रूप से ठोस निर्णय लिया जा सके।
इस बीच, लोकसभा सचिवालय मानसून सत्र के लिए संभावित बैठक व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है। तृणमूल और शिवसेना (यूबीटी) के बागी समूहों के अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने भी कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है। कांग्रेस ने तमिलनाडु में दशकों पुराने गठबंधन को तोड़ते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) से हाथ मिला लिया है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल के टिकट पर कुल 29 सांसद निर्वाचित हुए थे।
इनमें से 20 सांसदों ने पार्टी छोड़कर पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) का दामन थाम लिया और अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। बागी समूह ने मोदी सरकार के प्रति समर्थन जताते हुए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की है। तृणमूल के एक सांसद का कुछ समय पहले निधन हो गया था और वह सीट अभी रिक्त है।
शिवसेना (यूबीटी) के मामले में पार्टी के टिकट पर निर्वाचित नौ सांसदों में से छह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने घोषणा की है। तृणमूल और शिवसेना (यूबीटी) दोनों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दलील दी है कि उनके बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। दोनों दलों का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से छूट तभी मिल सकती है, जब पार्टी के कुल सदस्यों में से दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग हों।