Jammu: खानाबदोश गुज्जर और बकरवाल समुदायों के सैकड़ों परिवारों ने जम्मू के गर्म मैदानी इलाकों से कश्मीर घाटी के हरे-भरे पहाड़ी चारागाहों की ओर अपना सालाना पलायन शुरू कर दिया है। वे अपने मवेशियों के साथ जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे से होते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
बकरियों, भेड़ों, घोड़ों और दूसरे मवेशियों के साथ की जाने वाली ये एक महीने से भी ज्यादा लंबी यात्रा काफी थकाने वाली होती है। इन परिवारों को पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और इस दौरान उन्हें खराब मौसम, रहने की जगह की कमी और दूसरी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
कश्मीर की ओर जा रहे इन खानाबदोशों ने बताया कि इस पलायन के दौरान उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग को टैक्स देने के बावजूद, उनके पारंपरिक चारागाहों वाले रास्तों पर वन विभाग ने रोक लगा दी है, जिससे उनके लिए उपलब्ध चारागाहों की जमीन कम हो गई है।
कुछ लोगों ने ये भी दावा किया कि उचित टैगिंग होने के बावजूद उन्हें अपने मवेशियों को ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने इसकी तुलना आधार-आधारित पहचान प्रणाली से की और आरोप लगाया कि रास्ते में कई जगहों पर उन्हें परेशान किया गया।
खानाबदोशों ने आगे कहा कि हालांकि सरकार ने उनके पलायन को आसान बनाने के लिए परिवहन सुविधाओं का वादा किया था, लेकिन अब तक उन्हें ऐसी कोई मदद नहीं मिली है, जिसके चलते उन्हें पिछले वर्षों की तरह ही पैदल चलकर ये कठिन यात्रा पूरी करनी पड़ रही है।