Nepal: नेपाल में अधिकारियों ने काठमांडू में नदी किनारे अवैध रूप से कब्जा की गई जमीनों पर रहने वालों को शुक्रवार से पहले इलाका खाली करने का नोटिस जारी किया है। वहीं, अतिक्रमणकारियों ने विध्वंस अभियान के विरोध में तीन सप्ताह तक प्रदर्शन की घोषणा की है।
काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण अभियान के तहत इस बाबत नोटिस जारी किया। नोटिस में लिखा है कि अधिकारी शुक्रवार सुबह सात बजे से सार्वजनिक भूमि या नदी किनारे बने अवैध ढांचों को ध्वस्त करेंगे। पिछले सप्ताह की शुरुआत में, केंद्र सरकार ने काठमांडू महानगरपालिका के समन्वय से बागमती नदी के किनारे थपाथली, गैरीगाउन, सिनामंगल और मनोहरा क्षेत्रों में भूमिहीन अतिक्रमणकारियों के अस्थायी और स्थायी घरों को ध्वस्त कर दिया था।
हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात करके विध्वंस अभियान के दौरान भूमिहीन अतिक्रमणकारियों की 1,500 से ज्यादा बस्तियों को ध्वस्त किया गया। सरकार ने विस्थापितों के लगभग 900 परिवारों की पहचान कर उन्हें दशरथ स्टेडियम, कीर्तिपुर और बालाजू क्षेत्र के लॉजों सहित अलग-अलग अस्थायी आवास क्षेत्रों में भेजा है।
काठमांडू महानगरपालिका के अधिकारियों के अनुसार, भूमिहीन बस्तियों की जांच के बाद, वास्तविक भूमिहीनों को वैकल्पिक आवास सुविधाएं दी जाएंगी। भूमिहीन अतिक्रमणकारियों ने शिकायत की कि सरकार ने उनके लिए उचित सुविधाओं की व्यवस्था किए बिना बहुत कम समय में उनकी बस्तियों को ध्वस्त कर दिया।
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े अखिल नेपाल भूमिहीन अतिक्रमणकारी संघ ने सरकार द्वारा अवैध ढांचों को ध्वस्त करने के अभियान के विरोध में दो चरणों वाले राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। उनके विरोध कार्यक्रमों में जनसभाएं, रैलियां, तीन मई से शुरू होने वाला हस्ताक्षर अभियान और 21 मई से शुरू होने वाली राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शामिल हैं।
तीन सप्ताह तक चलने वाले विरोध कार्यक्रम के तहत, वे प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए एक राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान भी शुरू करेंगे। उनका दावा है कि ये काम आम जनता के हितों के खिलाफ है।