Iran conflict: भारत ने ईरान संघर्ष के बीच वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का संयुक्त राष्ट्र में किया कड़ा विरोध

Iran conflict: भारत ने ईरान संघर्ष के बीच वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का कड़ा विरोध करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि क्षेत्र में हुए हमलों के कारण उसके कई नागरिकों की मौत हो गई है या वे लापता हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बुधवार को कहा, ‘‘हमने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसकी शुरुआत दुर्भाग्यवश रमजान के पवित्र महीने में हुई। हमने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।’’

‘अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना : पश्चिम एशिया में राजनीतिक समाधान को आगे बढ़ाना-स्थायी शांति के लिए मध्यस्थता और संवाद’ विषय पर सुरक्षा परिषद की खुली चर्चा में अपने संबोधन में पर्वतनेनी ने कहा कि भारत वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का दृढ़ता से विरोध करता है, क्योंकि वैश्विक कार्यबल में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, ‘‘क्षेत्र के देशों, वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री संपर्क मार्गों पर हुए हमलों के कारण कई भारतीय नागरिकों की जान गई है या वे लापता हैं।’’

सुरक्षा परिषद में पर्वतनेनी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत ने नयी दिल्ली में अमेरिका के प्रभारी राजनयिक जेसन मीक्स को तलब करके ओमान तट के निकट 24 भारतीय कर्मियों वाले वाणिज्यिक टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर अमेरिकी हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। हमले के बाद जहाज पर सवार चालक दल के 24 सदस्यों में से तीन लापता हो गए। वाणिज्यिक पोत ‘सेटेबेलो’ पर यह हमला तब हुआ, जब इसके दो दिन पहले ही पलाओ के झंडे वाले एक जहाज पर अमेरिकी नौसेना ने हमला किया था। उस जहाज पर 24 भारतीय सवार थे और जहाज ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। पर्वतनेनी ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं तथा उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति तंत्र क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है और किसी भी बड़े व्यवधान के भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं।’’ उन्होंने कहा कि ईरान संघर्ष के तेज होने और इसके अन्य देशों तक फैलने से व्यापक चिंता उत्पन्न हुई है। पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘बढ़ती तबाही, मौतों तथा सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों के ठप होने का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ा है। भारत इस क्षेत्र का निकटवर्ती पड़ोसी है और इसकी सुरक्षा एवं स्थिरता में उसके महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं।’’ भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति का आह्वान करते हुए नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालने, वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य निशाना नहीं बनाने, नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे पर हमले नहीं करने तथा संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने की अपील की। नयी दिल्ली ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन भी जताया।

भारत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इससे जान-माल की भारी हानि, बड़ी संख्या में नागरिकों का विस्थापन, नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा, वैश्विक व्यापार प्रवाह पर असर तथा स्थापित आपूर्ति शृंखलाओं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बड़े पैमाने पर व्यवधान उत्पन्न हुए हैं। भारत ने कहा कि गाजा की स्थिति के गंभीर मानवीय परिणाम हैं और इसके लिए स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच तथा बातचीत के जरिए दो-राष्ट्र समाधान पर आधारित स्थायी एवं शांतिपूर्ण व्यवस्था की ओर बढ़ने की आवश्यकता है।

भारत ने कहा कि इसके तहत एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राष्ट्र का गठन हो, जो सुरक्षित एवं मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल के साथ शांति और सुरक्षा के साथ रह सके। पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘स्थायी शांति और समग्र समृद्धि प्राप्त करने का यही एकमात्र रास्ता है।’’ उन्होंने परिषद को बताया कि भारत अगले कुछ दिनों में यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी फॉर फलस्तीन रिफ्यूजीस इन द नीयर ईस्ट (यूएनआरडब्ल्यूए) को 25 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता देगा। यह एजेंसी को भारत के वार्षिक 50 लाख डॉलर के योगदान की पहली किश्त होगी। लेबनान संकट के बीच भारत ने उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि भारतीय सैनिक ‘लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के अंतरिम बल’ (यूएनआईएफआईएल) में तैनात हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वे सुरक्षा परिषद द्वारा सौंपे गए महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं और उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत लेबनान को चिकित्सा सहायता भी भेजेगा।’’ भारत ने लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए तत्काल और व्यापक जांच की मांग की। भारत ने यह भी कहा कि मध्यस्थता संबंधी ढांचे एक बार स्थापित हो जाने के बाद हमेशा प्रभावी नहीं बने रहते। पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘यदि वे अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहते हैं और नयी परिस्थितियां उन्हें अप्रासंगिक बना देती हैं, तो हमें बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप अपने प्रयासों को ढालना होगा।’’

उन्होंने फलस्तीन मुद्दे का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे जुड़े कई पुराने मध्यस्थता ढांचे आज की परिस्थितियों में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज की गाजा शांति योजना और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ढांचा पहले के ढांचों की तुलना में काफी अलग हैं।’’ भारत ने सुरक्षा परिषद से कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्ष और उससे पैदा हो रही अपार मानवीय पीड़ा के कारण संयुक्त राष्ट्र की वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘संघर्ष की स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने में विफलता के कारण विश्व समुदाय के बीच इस संगठन की छवि काफी प्रभावित हुई है। इसका एक प्रमुख कारण सुरक्षा परिषद की आठ दशक पुरानी और अप्रासंगिक संरचना है, जिसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।’’ उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों का विस्तार करके वास्तविक सुधार लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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