India: दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल भारत में अब एक नया जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या के लिए चर्चित रहा भारत अब घटती प्रजनन दर (Fertility Rate) की चुनौती का सामना कर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है। यानी अब औसतन प्रति महिला उतने बच्चों का जन्म नहीं हो रहा, जितने किसी देश की जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक माने जाते हैं।
इसी मुद्दे ने हाल के दिनों में वैश्विक चर्चा तब बटोर ली, जब दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने भारत की जन्म दर को लेकर चिंता जताई। अमेरिका में बैठे मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि भारत की प्रजनन दर अब रिप्लेसमेंट स्तर से नीचे जा चुकी है। इससे पहले वह जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में गिरती जन्म दर को मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बता चुके हैं।ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एलन मस्क ने क्या कहा, उनकी चिंता कितनी गंभीर है और भारत के लिए इसके क्या मायने हैं।
क्या है एलन मस्क का पूरा बयान?
टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के रिपोर्ट का शीर्षक था— “India’s population will soon start shrinking, perhaps rapidly”, यानी “भारत की आबादी जल्द ही घटने लगेगी और संभव है कि यह गिरावट काफी तेज़ हो।” रिपोर्ट साझा करते हुए मस्क ने भारत में घटती जन्म दर पर चिंता जताई और संकेत दिया कि आने वाले दशकों में यह स्थिति देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना को प्रभावित कर सकती है।
आखिर किस ओर इशारा कर रहे हैं मस्क?
मस्क का मुख्य फोकस भारत की गिरती कुल प्रजनन दर पर है। किसी भी देश में जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए कुल प्रजनन दर का 2.1 होना जरूरी माना जाता है। इसे ही रिप्लेसमेंट लेवल फर्टिलिटी कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि औसतन प्रत्येक दंपति इतने बच्चों को जन्म दे कि अगली पीढ़ी में उनकी संख्या की भरपाई हो सके। लेकिन भारत की कुल प्रजनन दर अब घटकर लगभग 1.9 तक पहुंच चुकी है, जो इस मानक से नीचे है।
सरल शब्दों में कहें तो देश में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या धीरे-धीरे उस स्तर से नीचे जा रही है, जो भविष्य में मौजूदा आबादी को प्रतिस्थापित कर सके। यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में युवाओं की संख्या घट सकती है और वृद्ध आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ सकता है।
भारत के लिए क्यों चिंता की बात है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल भारत को अपनी विशाल युवा आबादी का लाभ मिल रहा है, जिसे डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा जाता है। लेकिन यदि जन्म दर लगातार गिरती रही तो भविष्य में श्रमशक्ति की कमी, आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट और सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ता बोझ जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
जापान, दक्षिण कोरिया, इटली और चीन जैसे देशों में पहले से ही घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव देखा जा रहा है। मस्क का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भारत भी लंबे समय में ऐसी ही स्थिति का सामना कर सकता है।
मस्क कई वर्षों से यह कहते आ रहे हैं कि दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट जनसंख्या विस्फोट नहीं, बल्कि तेजी से गिरती जन्म दर है। उनके अनुसार, यदि पर्याप्त बच्चे पैदा नहीं होंगे तो भविष्य में मानव सभ्यता को गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।