Bangladesh: बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की, ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिछले हफ्ते दिल्ली में वर्चुअल मीडिया बातचीत को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तनाव पैदा हो गया है। दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग ने एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि बैठक लगभग आधे घंटे तक चली और इससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि ये तुरंत साफ नहीं हो पाया कि बैठक में दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, ढाका में भारत के उच्चायुक्त (केंद्रीय मंत्री के दर्जे के साथ) के तौर पर कार्यभार संभालने के छह हफ्ते से ज्यादा समय बाद त्रिवेदी की रहमान के साथ ये पहली औपचारिक मुलाकात थी।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता त्रिवेदी, इस राजनयिक पद को संभालने वाले पहले राजनेता हैं।
ये बैठक ऐसे कयासों के बीच हुई कि रहमान, जिन्हें भारत ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, वे 12-13 सितंबर को होने वाले इस कार्यक्रम में नहीं शामिल हो सकते हैं। दिल्ली में बीते पांच अगस्त को शेख हसीना के प्रेस को वर्चुअली संबोधित करने के बाद भारत- बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आ गया है। उन्होंने कहा कि जेल या मौत की सजा के खतरे के बावजूद वो दिसंबर में देश लौटने और लोकतंत्र बहाल करके देश को “सही रास्ते” पर लाने के लिए पक्का इरादा रखती हैं।
बांग्लादेश ने मीडिया के साथ हुई इस बातचीत पर नाराजगी जाहिर की। उसका कहना है कि इस घटना से वहां के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध बेहतर बनाने की कोशिशों पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने हसीना को “फरार और नरसंहार की दोषी” बताया। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने सात अगस्त को कहा कि हसीना से जुड़े मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और वो उस फोरम में बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का समर्थन नहीं करता है।
त्रिवेदी ने कहा कि रहमान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक से दोनों देशों के रिश्तों की समस्याओं को सुलझाने में मदद मिल सकती है। त्रिवेदी ने कहा, “जब दो नेता मिलते हैं, तो कई समस्याएं हल हो जाती हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि बैठक से समस्या का समाधान हो जाएगा। हम सभी बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान का बहुत सम्मान करते हैं। वो लोगों से जुड़े नेता हैं, और हमारे पीएम भी लोगों से जुड़े नेता हैं।”
उच्चायुक्त ने रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुुर रहमान से भी मुलाकात की। लेकिन किसी भी पक्ष ने बातचीत के मुद्दों के बारे में जानकारी नहीं दी। उच्चायुक्त और विदेश मंत्री की बैठक की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “मैं बस इतना बता सकता हूं कि ये पहले से तय बैठक थी और मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या बातचीत की।”
अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था, जिसके बाद वो भारत भाग आई थीं। नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कथित “मानवता के खिलाफ अपराधों” के लिए उन्हें उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई, तब से ढाका भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
ये ताजा राजनयिक तनाव भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक मुश्किल बदलाव के बीच आया है। फरवरी में रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सत्ता में आने के बाद ये संबंध फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही थी, जबकि इससे पहले अंतरिम सरकार के दौरान हसीना के प्रत्यर्पण, सीमा से जुड़े मुद्दों और ढाका की चीन की ओर झुकी विदेश नीति जैसे मुद्दों पर रिश्ते तनावपूर्ण थे। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार का कहना है कि अगर हसीना लौटती हैं, तो उन्हें समर्पण करना होगा और कानून का सामना करना होगा।