Himachal: पुरानी कहावत है कि रोजाना एक सेब खाने से आप डॉक्टरों से दूर रहते हैं यानी कम बीमार पड़ते हैं, अगर आप भी इसी मूलमंत्र से अपने आप को सेहतमंद रखते हैं तो ये खबर खास आपके लिए है। हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब के उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है, जिसका मुख्य कारण अप्रत्याशित मौसम है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और हिमपात से सेब की फसलें बड़ी मात्रा में क्षतिग्रस्त हो गईं हैं।
बागवानी विभाग का कहना है कि इस सीजन में अब तक करीब 1.15 करोड़ बक्से बाजार में पहुंचे हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 2.18 करोड़ बक्से पहुंचे थे। राज्य के ऊपरी इलाकों के बागवानों का कहना है कि उन्हें अपने बागों के रखरखाव की लागत वसूलना भी मुश्किल पड़ रहा है।
उर्वरक, कीटनाशक, श्रम और पैकिंग सामग्री सहित सभी इनपुट की लागत बढ़ गई है। इससे उनके पास मुनाफा बहुत कम रह गया है, ऐसे समय में जब फसलों की पैदावार और गुणवत्ता भी काफी प्रभावित हुई है। इनके अलावा और ज्यादा ऊपरी इलाकों के बागवानों के पास दूसरी फसल पर निर्भर रहने की बहुत कम गुंजाइश बची है।
बागवानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बागवानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए उच्च घनत्व वाले वृक्षारोपण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उत्पादकों को पुनर्गठित मौसम-आधारित बीमा योजना में पंजीकरण कराने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो ओलावृष्टि और कम तापमान जैसी मौसमी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कवर करती है। मौजूदा हालात में बागवानोंको अपनी फसलों और आय दोनों के लिए बढ़ते जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।