New Drug Rules 2026:अगर आप मेडिकल स्टोर से कफ सिरप या अन्य ओरल दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीद लेते हैं, तो अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। यह नया नियम सरकारी गजट में प्रकाशित होने के छह महीने बाद लागू होगा।
नए नियमों के तहत 30 मिलीलीटर से अधिक पैकिंग और 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल वाली सभी ओरल दवाओं को शेड्यूल H1 में शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि अब ऐसी दवाएं केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकेंगी। साथ ही मेडिकल स्टोर संचालकों को इनकी बिक्री का रिकॉर्ड भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ड्रग्स रूल्स, 1945 में किया गया यह संशोधन उन दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए है जिनमें एथिल अल्कोहल की मात्रा अधिक होती है। सरकार का मानना है कि कुछ उत्पादों का इस्तेमाल चिकित्सा जरूरतों के बजाय नशे के उद्देश्य से किया जा सकता है।
अब तक कुछ आयुर्वेदिक और हर्बल प्रोडक्ट्स, जैसे इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित टिंचर, शेड्यूल-K के तहत लाइसेंस संबंधी छूट का लाभ लेते थे। इनमें कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल पाया जाता है। कई राज्यों ने ऐसे उत्पादों के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव का फैसला लिया।
शेड्यूल-K की छूट खत्म
नए संशोधन के अनुसार, 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल (v/v) वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग में बिकने वाली दवाओं को अब शेड्यूल-K के तहत मिलने वाली छूट नहीं मिलेगी। ऐसे उत्पादों के निर्माण और बिक्री के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
क्या होगा फायदा?
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से:
- अधिक अल्कोहल वाली दवाओं की निगरानी बेहतर होगी।
- इनका वितरण केवल अधिकृत दवा विक्रेताओं और वैध चैनलों के माध्यम से होगा।
- नशे या अन्य गैर-चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
- जरूरतमंद मरीजों को आवश्यक दवाएं पहले की तरह उपलब्ध होती रहेंगी।
कफ सिरप पर भी सख्ती
गौरतलब है कि इससे पहले 16 जून 2026 को केंद्र सरकार ने एक अन्य अधिसूचना जारी कर कफ सिरप समेत कई सिरप आधारित दवाओं की बिक्री पर सख्ती बढ़ाई थी। इसके तहत कुछ दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के बेचने पर रोक लगाने का फैसला किया गया था। यह कदम खांसी और अन्य ओरल लिक्विड दवाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया था।
सरकार का कहना है कि यह संशोधन देश में दवा नियमन को मजबूत करने, दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने तथा जनता के स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।