Haryana: अब हवा में होगी आलू की पैदावार, हरियाणा के एक संस्थान ने बिना मिट्टी के कर दिखाया करिश्मा

Haryana: आम तौर पर आलू को जमीन में उगाया जाता है लेकिन आलू अगर हवा में लटकाकर उगाए जाए तो ताज्जुब होना लाजिमी है लेकिन अब ऐसा हो रहा है। हरियाणा में करनाल जिले के शामगढ़ गांव में आलू प्रौद्योगिकी संस्थान, एरोपोनिक्स तकनीक से आलू पैदा कर रहा है।

आलू एक ऐसी फसल है जिसके बिना दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में भोजन की कल्पना करना मुश्किल है। एरोपोनिक्स तकनीक की बात करें तो ये एक ऐसी विधि है जिसमें पोषक तत्वों को महीन फुहार के रूप में सीधे जड़ों तक पहुंचाया जाता है। फसल उगाने के लिए जमीन की जरूरत न होने के अलावा, ये तकनीक मिट्टी जनित रोगों को रोकने में भी मदद करती है, जिससे अच्छी फसल पैदा होती है।

आलू प्रौद्योगिकी केंद्र के उप-निदेशक डॉ. मनोज भानुकर ने बताया कि “खेतों में जो लोग आलू लगा रहे हैं, उसमें अब क्या है खेतों में लगाने की वजह से बार-बार वही क्रॉप लगाने की वजह से बहुत ही ज्यादा पेस्ट, डिजीज इंफेस्टेशन जो है हमारी मिट्टी में पाया जाने लगा है। जैसे की आलू में पपड़ी रोग हो गया उसमें काफी समस्या बढ़ती जा रही है। तो इन चीजों को जो है हमारा एरोपोनिक्स जिसे हम बोलते हैं जिसका अर्थ है मिट्टी के बिना, पोषक घोल में फसल उगाना। मतलब की भाप की तरह मिस्ट के रूप में न्यूट्रिएंट्स को अप्लाई करके रूट जोन में और वहां पर जो है सीड प्रोडक्शन का कार्य एरोपोनिक्स के माध्यम से हम सेंटर पर कर रहे हैं।”

ये संस्थान आलू की खेती के लिए इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को प्रशिक्षण भी देता है, आलू प्रौद्योगिकी केंद्र के शामगढ़ उप-निदेशक डॉ. मनोज भानुकर ने कहा कि

“देखिए इसकी जो प्रायर जो चीज है हम यहां पर क्या करते हैं, हमारे पास यहां पर टिशू कल्चर लैब है जो की भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है। वहां पर हम सीपीआरआई से कल्चर ट्यूब लाकर हम प्लांट्स बनाते हैं, जिसे आप आलू की पौध भी कह सकते हैं। उस पौध को फिर हम यहां पर ट्रांसप्लांट करते हैं अपने एरोपोनिक्स यूनिट में। यहां पर ट्रांसप्लांट करने के बाद, पश्चात तकरीबन आप मानकर चलिए की 70-75 दिन के बाद से हमारी छोटे कंदों का उत्पादन शुरू हो जाता है और हम पैदावार करते हैं 90 दिन तक हम छोटे कंदों की पैदावार करते हैं।”

संस्थान ने आलू की एक नई किस्म- कुफरी उदय भी विकसित की है, इसकी खासियत ये है कि ये तेजी से पकती है। एक बराबर और उच्च गुणवत्ता वाले आलू पैदा करती है, साथ ही बीमारी आने की संभावना भी न के बराबर रहती है।

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