Delhi: प्रदूषण रोकने के लिए मुहिम, विशेषज्ञों ने निरंतर निगरानी और जनभागीदारी को बताया अहम

Delhi: दिल्ली की अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली शहर में बिगड़ते वायु प्रदूषण संकट की एक बड़ी वजह है। पर्यावरण अनुसंधान एवं कार्रवाई समूह चिंतन की एक नई रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है ‘शहर में धुआं: दिल्ली में खुले में कचरा जलाने को कैसे रोकें’, इसके मुताबिक राजधानी में प्रतिदिन खुले में कचरा जलाया जा रहा है और स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों के पास कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं।

इसके परिणामस्वरूप शहर के निवासी प्रदूषण के संपर्क में आ रहे हैं। अनुसंधान समूह के मुताबिक एमसीडी द्वारा नामित शून्य अपशिष्ट कॉलोनियों की जांच करने वाली एक अन्य रिपोर्ट में दिल्ली में विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के कार्यान्वयन में कमियों का दावा किया गया है।

अध्ययन से पता चला कि अधिकांश कॉलोनियों में न तो गीले कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा था और न ही कचरे को ठीक से अलग किया जा रहा था, जिससे राजधानी की शून्य अपशिष्ट पहलों की प्रभावशीलता पर चिंताएं बढ़ गई हैं।

रिपोर्ट पर चर्चा के लिए आयोजित एक संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने ये भी बताया कि अपशिष्ट संग्रहण प्रणालियों का कमजोर कार्यान्वयन और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व मानदंडों का खराब प्रवर्तन दिल्ली में अपशिष्ट और प्रदूषण की समस्या को और ज्यादा बढ़ा देता है

उन्होंने अपशिष्ट पृथक्करण और खाद बनाने के प्रयासों में मजबूत निगरानी तंत्र और नागरिकों की बेहतर भागीदारी की आवश्यकता पर भी बल दिया। रिपोर्ट में खुले में कचरा जलाने पर कड़ी कार्रवाई, कचरे के पुनर्चक्रण और खाद बनाने के लिए प्रोत्साहन और कचरा बीनने वालों को औपचारिक पुनर्चक्रण प्रणालियों में शामिल करने की सिफारिश की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में लैंडफिल कचरे को कम करने और कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक निवेश, निरंतर निगरानी और जनभागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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