Year Ender 2025: साल 2025 में रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में अहम बदलाव किए। बैंक ने रेपो रेट में कुल 125 आधार अंकों की कटौती की। ये 1.25 फीसदी के बराबर है, मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और लगातार कम होती महंगाई को देखते हुए ये फैसले किए गए।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने लचीलापन दिखाया, भारत ने मौजूदा वित्तीय साल की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 8.2 फीसदी विकास दर दर्ज किया। खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक की दो फीसदी की न्यूनतम सहनशीलता सीमा से नीचे रही। इससे केंद्रीय बैंक को कर्ज देने और घरेलू मांग को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दरें कम करने में मदद मिली।
रेपो रेट वो दर है जिस पर बैंक, रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। रेपो रेट में कटौती से अमूमन उपभोक्ताओं के कर्ज की दरें कम हो जाती हैं। इससे कर्ज लेने की कुल लागत कम हो जाती है। ब्याज दरों में कमी का दौर फरवरी में 25 आधार अंकों की कटौती के साथ शुरू हुआ। इससे रेपो दर घटकर 6.25 प्रतिशत हो गया। अप्रैल में भी 25 आधार अंकों की कटौती की गई।
सबसे बड़ी राहत जून में मिली। रिजर्व बैंक ने अप्रत्याशित रूप से 50 आधार अंकों की कटौती की, इससे रेपो रेट 5.50 फीसदी हो गया। साल का अंत भी सकारात्मक रहा। दिसंबर में 25 आधार अंक की कटौती हुई, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया।
नतीजा ये निकला कि बैंकों ने इसका लाभ उपभोक्ताओं को दिया और आम लोगों की खरीदने की ताकत बढ़ी। ब्याज दरों में कमी से उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों के लिए कर्ज की लागत कम हो गई। आम लोगों को सस्ते कर्ज का फायदा मिला। व्यापार में पूंजी की लागत में कमी आई, जिससे निवेश और तमाम आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली।
2025 में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला लगभग पांच सालों में पहली बार हुआ। पिछली कटौती 22 मई, 2020 को की गई थी, जब रिजर्व बैंक ने कोविड-19 के दौरान रेपो रेट को 40 आधार अंक घटाया था, साल खत्म होने को है। अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि बेशक वैश्विक जोखिम भारतीय अर्थव्यवस्था की राह में चुनौतियां पेश करते रहे, रिजर्व बैंक की सुनियोजित ब्याज दर कटौतियों ने मजबूत आर्थिक विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाने में मदद की।