हाल के महीनों में सोने की कीमतों में सुस्ती और निवेशकों की घटती रुचि के बावजूद, वैश्विक वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च ने सोने को लेकर अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की चौथी तिमाही तक सोने की औसत कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जबकि 2027 के अंत तक यह 6,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छू सकती है।रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतें मौजूदा स्तरों से काफी ऊपर रहने की संभावना है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई का दबाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सोने को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
2026 की शुरुआत में स्पॉट गोल्ड ने जोरदार तेजी दिखाई थी, लेकिन मार्च के बाद इसमें ठहराव देखने को मिला और कीमतें गिरकर वर्ष के न्यूनतम स्तर 4,170 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं।जेपी मॉर्गन का कहना है कि सोने का भविष्य मुख्य रूप से दो बड़े कारकों पर निर्भर करेगा—दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों का समाधान,अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति , फिलहाल इन दोनों मोर्चों पर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे बाजार की दिशा तय करना मुश्किल हो रहा है।
जेपी मॉर्गन में बेस और प्रेशियस मेटल्स विभाग के प्रमुख ग्रेग शियरर के अनुसार, फिलहाल सोना तकनीकी रूप से एक ऐसे दायरे में फंसा हुआ है जहां इसमें न तो बड़ी तेजी दिख रही है और न ही बड़ी गिरावट।उन्होंने कहा कि बढ़ती आशंका है कि ऊर्जा कीमतों से बढ़ रही महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इसी वजह से इस समय अधिकांश निवेशकों का ध्यान सोने से हटकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर गया है।
फिर भी क्यों मजबूत है सोने की चमक?
जेपी मॉर्गन का मानना है कि जिन कारणों ने पिछले कुछ वर्षों में सोने की मांग को बढ़ावा दिया था, वे आज भी मौजूद हैं। इनमें शामिल हैं—बढ़ती महंगाई और क्रय शक्ति में गिरावट,अमेरिका की बढ़ती राजकोषीय चुनौतियां,वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता,देशों के बीच बढ़ता आर्थिक विभाजन,नीतिगत अनिश्चितता इन परिस्थितियों में निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं।
केंद्रीय बैंक अब भी खरीद रहे हैं सोना
रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के वर्षों में सोने की तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ी वजह रही है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने कुल 129 टन सोना बेचा और केवल 16 टन की शुद्ध खरीद दर्ज की गई, लेकिन जेपी मॉर्गन का कहना है कि वास्तविक खरीद इससे कहीं अधिक हो सकती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के वैकल्पिक अनुमानों के अनुसार, ओवर-द-काउंटर (OTC) बाजार और स्विस रिफाइनरियों के आंकड़ों को शामिल करने पर पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद 244 टन तक पहुंच सकती है, जो पिछली तिमाही के 208 टन से अधिक है।