Sports: भारतीय क्रिकेट टीम से लंबे समय से बाहर चल रहे सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने राष्ट्रीय टीम में वापसी को लेकर अपनी सोच जाहिर की है। 26 वर्षीय बल्लेबाज का कहना है कि टीम इंडिया की जर्सी दोबारा पहनने की इच्छा उनके मन में हमेशा रहती है, लेकिन अब उन्होंने भविष्य की ज्यादा चिंता करने के बजाय मौजूदा प्रदर्शन पर ध्यान देना सीख लिया है। शॉ ने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला करीब पांच साल पहले खेला था।
गुरुवार को रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र ने बंगाल को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस जीत के बाद बातचीत में शॉ ने कहा कि भारतीय टीम में वापसी का सपना उनके जेहन में जरूर रहता है, लेकिन वह एक समय में एक ही चीज पर ध्यान देना चाहते हैं। उनके मुताबिक, फिलहाल उनकी प्राथमिकता मैच जीतना, नियमित अभ्यास करना और अपनी फिटनेस व खानपान का ध्यान रखना है।
शॉ के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती घरेलू क्रिकेट में निरंतरता के साथ रन बनाना है। मौजूदा रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने सात पारियों में दो अर्धशतक लगाए हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिल्ली के खिलाफ शुरुआती मुकाबले में आया, जहां उन्होंने 70 रन बनाए। इसके बाद उनकी पारियों में 7, 21, 0, 17 और 12 रन दर्ज हुए। अपनी बल्लेबाजी को लेकर शॉ ने कहा कि क्रिकेट में हर पारी एक जैसी नहीं होती। कभी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने में सफल रहता है, तो कभी अच्छी गेंदों या अपने आक्रामक शॉट खेलने के प्रयास में विकेट गंवा देता है। उन्होंने अपनी तकनीक को लेकर किसी बड़ी परेशानी से इनकार किया और कहा कि उन्हें बस एक बड़ी पारी की जरूरत है।
पिछले सीजन में मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र की टीम से जुड़े पृथ्वी शॉ ने नए माहौल को लेकर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि मुंबई और पुणे के बीच ज्यादा दूरी नहीं है और महाराष्ट्र की टीम में उन्हें कई पुराने साथी मिले हैं। ऋतुराज गायकवाड़ और अंकित बावने जैसे खिलाड़ियों के साथ उनकी पहले से अच्छी जान-पहचान और तालमेल है। बंगाल के खिलाफ मिली 10 विकेट की जीत को शॉ ने पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का नतीजा बताया। खास तौर पर उन्होंने गेंदबाजों की तारीफ की, जिन्होंने तेज गेंदबाजों के अनुकूल पिच पर महाराष्ट्र को मुकाबले में मजबूत स्थिति दिलाई।
शॉ के मुताबिक, पहली पारी में दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, क्योंकि पिच बल्लेबाजी के लिए आसान नजर आने के बावजूद तेज गेंदबाजों को काफी मदद दे रही थी। हालांकि, दूसरी पारी में बंगाल का स्कोर 25 रन पर तीन विकेट होने के बाद महाराष्ट्र को जीत का भरोसा हो गया था।
इस मुकाबले में भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का सामना करना भी बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती रहा। शॉ ने शमी की गेंदबाजी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रफ्तार और धार में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने यह भी माना कि शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज के सामने बल्लेबाजी करते समय उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव और उपलब्धियों का खयाल स्वाभाविक रूप से मन में आता है।
शॉ के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों और गेंदबाजों के अनुकूल पिच पर शमी का सामना करना आसान नहीं था। इसलिए बल्लेबाजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी गेंदबाजी से निपटने की रणनीति तैयार करना था। फिलहाल पृथ्वी शॉ का पूरा ध्यान घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने और लगातार रन बनाने पर है। भारतीय टीम में वापसी की राह भले ही चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन इस युवा बल्लेबाज ने राष्ट्रीय टीम में दोबारा जगह बनाने की उम्मीद अब भी कायम रखी है।