Ayodhya: रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान इस बार सामूहिक सरयू आरती को विशेष और भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। 7 नवंबर को आयोजित होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में 2,100 से अधिक श्रद्धालु एक साथ आरती करेंगे। आयोजन को यादगार बनाने के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। संस्कृत विद्यालयों के बटुक सरयू घाट पर आरती की बारीकियों का अभ्यास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होने वाले इस कार्यक्रम में सभी प्रतिभागी एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर निर्धारित ताल और क्रम में मां सरयू की आराधना करेंगे।
सामाजिक समरसता का संदेश देगी सामूहिक आरती
अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी के मुताबिक, सामूहिक सरयू आरती के माध्यम से शहर के अलग-अलग समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस आयोजन में दलित और निषाद समाज की महिलाओं के अलावा समाजसेवी महिलाएं, सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़ी हस्तियां और संस्कृत विद्यालयों के बटुक भी हिस्सा लेंगे। इस पहल का मकसद विभिन्न सामाजिक वर्गों को अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है। इसके जरिए लोग अपनी विरासत को करीब से समझ सकेंगे और उसके संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
दीपोत्सव के बीच सरयू तट पर दिखेगा अद्भुत नजारा
महापौर ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में जब बड़ी संख्या में महिलाएं समान परिधान में एक साथ आरती करती हैं, तो सरयू घाट का वातावरण बेहद भव्य और मनमोहक हो जाता है। सभी प्रतिभागियों की एकजुटता और समन्वय इस आयोजन को खास बनाते हैं। उन्होंने मां सरयू को अयोध्या की धार्मिक और भौगोलिक पहचान का अहम आधार बताते हुए कहा कि नदी का जुड़ाव भगवान श्रीराम के काल से माना जाता है। ऐसे में सरयू आरती का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
700 से ज्यादा संस्कृत बटुक करेंगे मंत्रोच्चार
श्री निःशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय के गुरु राजेश शुक्ला ने जानकारी दी कि इस वर्ष सामूहिक आरती में अलग-अलग संस्कृत विद्यालयों के 700 से अधिक बटुक भाग लेंगे। इसके लिए नियमित अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि आयोजन के दिन सभी बटुक तय क्रम में एक साथ मंत्रोच्चार और आरती की विधि पूरी कर सकें।
वहीं, बटुक प्रवीण मिश्रा का कहना है कि योगी सरकार के प्रयासों से अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है। दीपोत्सव को हर साल अधिक आकर्षक बनाने के साथ-साथ ऐसे आयोजनों के जरिए युवाओं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। उनके अनुसार, सामूहिक सरयू आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को समझने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।