Kashmir: उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में एक किसान ने सेब की खेती में लगातार हो रहे नुकसान से बचने के लिए नई राह तलाश की है। क्रेरी कस्बे के रहने वाले फैयाज अहमद ने पारंपरिक सेब की खेती के साथ अब ब्लूबेरी उगाने की शुरुआत की है। उनका यह प्रयोग खेती में विविधता लाने और किसानों के लिए आमदनी के नए अवसर तलाशने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
फैयाज अहमद ने करीब दो कनाल जमीन पर ब्लूबेरी के लगभग 550 पौधे लगाए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम फल के रूप में पहचानी जाने वाली ब्लूबेरी की खेती से उन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद है। उनका मानना है कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फलों और फसलों की खेती को भी अपनाना चाहिए।
2,000 से 3,000 रुपये किलो तक है ब्लूबेरी की कीमत
किसान फैयाज अहमद के मुताबिक, ब्लूबेरी मूल रूप से उत्तरी अमेरिका का फल है और बाजार में इसकी मांग प्रीमियम श्रेणी में आती है। इसकी कीमत बाजार की स्थिति के अनुसार लगभग 2,000 से 3,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है।
उन्होंने दूसरे किसानों को भी खेती में नए विकल्प आजमाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अगर किसी साल सेब की फसल खराब हो जाती है या उससे नुकसान होता है, तो दूसरी फसलों से होने वाली कमाई आर्थिक नुकसान की भरपाई में मदद कर सकती है। इससे किसानों की आय के स्रोत भी बढ़ेंगे।
20 पौधों से शुरू हुआ प्रयोग, अब तैयार किया पूरा बाग
फैयाज ने ब्लूबेरी की खेती का परीक्षण इस साल की शुरुआत में किया था। सबसे पहले उन्होंने विदेश से हाई-चिल किस्म के करीब 20 पौधे मंगवाए। इन पौधों को लगाने का उद्देश्य यह जानना था कि क्या कश्मीर की जलवायु में ब्लूबेरी की खेती सफल हो सकती है।
शुरुआती नतीजे सकारात्मक मिलने के बाद उन्होंने इस प्रयोग को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद करीब दो कनाल जमीन में 550 पौधों के साथ ब्लूबेरी का बाग तैयार किया।
फैयाज के मुताबिक, शुरुआती परीक्षण में पौधों की अच्छी वृद्धि हुई, जिससे उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने व्यावसायिक स्तर पर इसकी खेती शुरू करने की दिशा में कदम उठाया।
कश्मीर के किसानों के लिए खेती में विविधता का संदेश
कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन मौसम की मार और फसल को होने वाले नुकसान के कारण किसानों को कई बार आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ब्लूबेरी जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है।
फैयाज अहमद को उम्मीद है कि उनका यह प्रयोग क्षेत्र के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ नए फल उगाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उनका मानना है कि फसलों में विविधता अपनाकर किसान जोखिम कम कर सकते हैं और अपनी आमदनी को अधिक सुरक्षित बना सकते हैं।
कश्मीर में ब्लूबेरी की खेती का यह शुरुआती प्रयोग आने वाले समय में बागवानी के क्षेत्र में नए अवसर खोल सकता है।