Diwali: मुंबई के प्रमुख मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने वाले केंद्रों में शामिल धारावी में दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं, यहां कारीगर चाक पर मिट्टी को आकार देकर खूबसूरत दीये तैयार करने में जुटे हैं। रोशनी के त्योहार दिवाली के करीब आते ही कुम्हारों का काम तेज हो गया है। उनके हाथों से बने मिट्टी के दीये देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचेंगे और भारतीय संस्कृति से जुड़ी इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाएंगे।
धारावी के इस पॉटरी हब में साधारण मिट्टी के दीयों से लेकर आकर्षक रंगों और कलात्मक डिजाइनों वाले दीयों तक कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यहां बने सामान की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी रहती है। हालांकि, इस साल कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और बिक्री में कमी के चलते कारीगरों के पास बड़ी मात्रा में तैयार माल बचा हुआ है। बाजार में मंदी के बावजूद खरीदारों की आवाजाही जारी है। लोग दिवाली पर अपने घरों को सजाने के लिए पारंपरिक मिट्टी के दीयों और सजावटी सामान की खरीदारी कर रहे हैं।
पारंपरिक दीयों के अलावा आकर्षक डिजाइन वाले दीये और दूसरे सजावटी उत्पाद भी ग्राहकों को लुभा रहे हैं। उत्पादों की अलग-अलग रेंज के चलते मुंबई के बाहर से भी लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। विक्रेता घरेलू ग्राहकों के साथ विदेशी बाजारों की मांग को भी ध्यान में रखकर सामान तैयार करते हैं।
हर दीये के पीछे कारीगरों की घंटों की मेहनत और हुनर छिपा होता है। मिट्टी तैयार करने से लेकर उसे चाक पर आकार देने और फिर सुखाने तक की पूरी प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है। अब दिवाली नजदीक आने के साथ धारावी के कारीगरों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले बिक्री में तेजी आएगी। बेहतर कारोबार से न केवल उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही इस पारंपरिक कला को भी जिंदा रखने में मदद मिलेगी।