Bikaner: थिएटर केवल मनोरंजन का जरिया ही नहीं है, बल्कि ये लोगों को मानवीय भावनाओं को समझने और जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया विकसित करने में मदद करने का एक मजबूत माध्यम भी है।
इसी सोच के साथ, राजस्थान की बीकानेर केंद्रीय जेल में ‘थिएटर टू ट्रांसफॉर्मेशन’ नाम की 10 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। ‘मलंग फाउंडेशन’ और ‘कृषि विश्वविद्यालय’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में 32 कैदियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इसमें हिस्सा लेने वाले कैदी ‘अगम पंथ’ नामक एक नाट्य प्रस्तुति देंगे, जो कबीर की कविताओं से प्रेरित है।
इस कार्यशाला का मकसद कला को आत्म-अभिव्यक्ति के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना है, ताकि कैदियों को अपनी भावनाओं को समझने और जेल के जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सके।
जेल प्रशासन का कहना है कि वो ऐसे कार्यक्रमों को जारी रखने की योजना बना रहा है। इसका मकसद कैदियों के पुनर्वास और उन्हें फिर से समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में मदद करना है।