USA: भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका के उद्योग जगत के प्रमुख अधिकारियों और भारतीय राजनयिकों ने ह्यूस्टन में बैठक की। इस बैठक में भू-तापीय ऊर्जा (जियोथर्मल एनर्जी) को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य नई तकनीक भारत तक पहुंचाना, मिलकर नई परियोजनाएं शुरू करना और भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना था। इसके लिए ड्रिलिंग, जमीन के नीचे इंजीनियरिंग और तेल क्षेत्र में ह्यूस्टन के अनुभव का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्य दूतावास, यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम और प्रोजेक्ट इनरस्पेस ने एक बैठक आयोजित की। इसमें उन्नत भू-तापीय तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। इसका मकसद भारत में प्रदूषण रहित ऊर्जा को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। साथ ही, डेटा सेंटरों और बड़े उद्योगों में ठंडक बनाए रखने के लिए बढ़ती ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने में इस तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। भू-तापीय ऊर्जा में धरती के अंदर की गर्मी का इस्तेमाल किया जाता है।
14 अक्टूबर को हुई चर्चा में भारत के महावाणिज्य दूत डी.सी. मंजूनाथ ने स्वच्छ ऊर्जा को लेकर देश के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 500 गीगावाट ऊर्जा क्षमता हासिल करना और 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य पूरा करना है।उन्होंने भू-तापीय ऊर्जा को इन लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार बताया।
प्रोजेक्ट इनरस्पेस के कार्यकारी निदेशक ड्रू नेल्सन ने ‘भारत में भू-तापीय ऊर्जा का भविष्य’ नाम की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष पेश किए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्नत भू-तापीय तकनीक से देश में बिजली पैदा करने, उद्योगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और बड़े डेटा सेंटरों को ठंडा रखने में मदद मिल सकती है।
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सीनियर डायरेक्टर सिद्धार्थ आर्यन की अगुवाई में हुई चर्चा में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें बेकर ह्यूजेस, फेर्वो एनर्जी, सेज जियोसिस्टम्स, ADI एनालिटिक्स, ऑल्टरजी रिसोर्सेज और ग्रेटर ह्यूस्टन पार्टनरशिप के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में भू-तापीय ऊर्जा परियोजनाओं में जोखिम कम करने, नई तकनीक भारत तक पहुंचाने और परियोजनाओं से जुड़े नियमों व मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
भारत का महावाणिज्य दूतावास अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को भारतीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और शोध संस्थानों से जोड़ने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य भू-तापीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू करना और दोनों देशों के बीच कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देना है।