Japan: प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जापान-अमेरिका का संयुक्त अभ्यास शुरू

Japan:  जापान और अमेरिका की सेनाओं ने अपने सबसे बड़े संयुक्त अभ्यासों में से एक की शुरुआत की। इस अभ्यास का मुख्य फोकस जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों की सुरक्षा करना है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अभ्यास में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है। हर दो साल में होने वाले ‘कीन स्वॉर्ड 27’ (Keen Sword 27) अभ्यास में जापान के लगभग 45,000 और अमेरिका के 12,000 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।

जापान के ‘जॉइंट स्टाफ’ के अनुसार, इस अभ्यास के कुछ हिस्सों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूरोप के सात देश भी शामिल हो रहे हैं। इनमें से पांच देश – फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड और फिलीपींस – पहली बार हिस्सा ले रहे हैं। 29 अक्टूबर तक चलने वाले अभ्यास के दौरान, जापानी और अमेरिकी सेनाएं मुख्य रूप से जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों और उत्तरी तटों के आसपास के समुद्री इलाकों की सुरक्षा पर ध्यान देंगी। जापान को चीन, उत्तर कोरिया और रूस की ओर से बढ़ते तनाव का सामना करना पड़ रहा है। जापान, प्रशांत महासागर सहित अपने आसपास के क्षेत्रों में चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य गतिविधियों को खतरे के रूप में देखता है। इसी वजह से, हाल के वर्षों में जापान ने अपने दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र को लंबी दूरी की मिसाइलों और इंटरसेप्टर प्रणालियों से मजबूत किया है।

इस अभ्यास में कई तरह की गतिविधियां शामिल हैं, जैसे समुद्र से जमीन पर उतरना (एम्फीबियस लैंडिंग), हवाई और मिसाइल सुरक्षा, समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाना, खुफिया जानकारी जुटाना, लॉजिस्टिक्स और रसद आपूर्ति और तनेगाशिमा सहित कई दूरदराज के द्वीपों से घायलों को सुरक्षित बाहर निकालना। अभ्यास के प्रमुख स्थानों में से एक ‘योनागुनी’ है, जो जापान का सबसे पश्चिमी द्वीप है। ये ताइवान से केवल 110 किलोमीटर (68 मील) पूर्व में स्थित है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिसे बीजिंग अपना क्षेत्र बताता है।

जापान के ‘सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ (आत्मरक्षा बल) ने एक अभ्यास के दौरान योनागुनी में अपनी पहली लंबी दूरी की ‘टाइप-25’ जमीन-से-जहाज पर मार करने वाली मिसाइल तैनात की है, हालांकि अभी कोई ‘टेस्ट-फायरिंग’ करने की योजना नहीं है। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर (620 मील) है और ये मुख्य भूमि चीन तक पहुंचने में सक्षम है। इस अभ्यास के लिए पहली बार योनागुनी में अमेरिका का जमीन-आधारित ‘एंटी-शिप’ मिसाइल सिस्टम ‘नेमेसिस’ (NMESIS) और कम दूरी का ‘सतह-से-हवा’ सिस्टम ‘मैडिस’ (MADIS) भी तैनात किया गया है। इसके अलावा, पास के इशिगाकी द्वीप पर एक मोबाइल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम, ‘हाइमर्स’ (HIMARS) को तैनात किया गया है।

‘जॉइंट स्टाफ’ के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल हिरोआकी उचिकुरा ने इस बात से इनकार किया कि ये अभ्यास किसी विशेष देश को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं। जापान के ‘जॉइंट स्टाफ’ के अनुसार, इशिगाकी में एक उद्घाटन समारोह के दौरान, जापान के ‘मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ के एडमिरल तातेकी तावारा ने कहा कि वे केवल अपने क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि आम लोगों के शांतिपूर्ण जीवन की भी रक्षा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ऐसा करने के लिए, पूरी तरह से तैयार रहना और संकट को रोकने के लिए अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है।”

जापानी और अमेरिकी सैनिकों ने सोमवार को ओकिनावा से लगभग 500 किलोमीटर (310 मील) दक्षिण-पूर्व में प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे, निर्जन द्वीप ‘ओकी-डैटो’ पर ‘लाइव-फायर’ (असली हथियारों से) अभ्यास किया। एक साल पहले सनाए ताकाइची की एक टिप्पणी के बाद चीन के साथ जापान के संबंधों में तनाव आ गया था। उन्होंने कहा था कि ताइवान पर चीन की सैन्य कार्रवाई की स्थिति में जापान का दखल उचित हो सकता है। उनके इस बयान से चीन नाराज हो गया, जिससे पैदा हुआ तनाव अब अर्थव्यवस्था तक भी पहुंच गया है।

जापान ने प्रशांत महासागर में अपने दूर-दराज द्वीपों के आसपास चीन द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही सैन्य गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। इस साल का ये सैन्य अभ्यास एक बहुत ही संवेदनशील समय पर हो रहा है। ये ओकिनावा में एक जापानी महिला की हत्या और लूटपाट के मामले में एक अमेरिकी नौसैनिक की गिरफ्तारी के कुछ हफ्तों बाद हो रहा है। ओकिनावा में हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इस मामले ने ओकिनावा में अमेरिकी सैन्य अड्डों के खिलाफ नाराजगी को फिर से हवा दे दी है। यहां के निवासी लंबे समय से अमेरिकी अड्डों से जुड़े शोर, प्रदूषण और अपराधों को लेकर शिकायत करते रहे हैं। जापान और अमेरिका के बीच हुए सुरक्षा समझौते के तहत जापान में तैनात लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिकों में से ज्यादातर सैनिक इसी छोटे, लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दक्षिणी द्वीप पर मौजूद हैं।

पिछले हफ्ते सैन्य अभ्यास में शामिल होने से पहले, जब विमानवाहक पोत ‘यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट’ कुछ समय के लिए योकोसुका स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा, तो वहां के मेयर कात्सुआकी कामिजी ने जापान के विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वे अमेरिकी सेना को समझाएं कि उनके कर्मचारियों के लिए जापानी नियमों का पालन करना जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *