Kolkata: मां दुर्गा के आने के साथ इंतजार खत्म हुआ। शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पंडालों में देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का स्वागत किया गया। इसी के साथ बहुप्रतीक्षित ‘पुजो’ यानी दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत हो गई।
दक्षिण कोलकाता में, मुदियाली क्लब के पंडाल में लोगों का तांता लगा हुआ है। यहां आने वाले लोग एक ऐसे उत्सव का अनुभव करने के लिए उत्सुक हैं, जो उन्हें बीते दौर की याद दिला देता है।
दुर्गा पूजा उत्सव आयोजन के 92वें साल मे इस क्लब ने एक पारंपरिक जमींदार के महल की भव्यता को फिर से साकार किया है। जमींदार वे रसूखदार भूमि-स्वामी होते थे जिन्हें ब्रिटिश शासन के तहत जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिला हुआ था। वे अपनी विशाल जमीनों को छोटे और गरीब किसानों को खेती के लिए यानी पट्टे पर देते थे और बदले में उनसे फसल का एक बड़ा हिस्सा या कर वसूलते थे।
पंडाल में लोगों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। एक धार्मिक त्योहार होने के अलावा, दुर्गा पूजा बंगाली संस्कृति का जश्न मनाने, पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखनेे और शहर के अलग-अलग इलाकों को देखने का भी एक मौका है।
कई त्योहारों की तरह, ये त्योहार भी लोगों के लिए अपनी सबसे बेहतरीन पोशाक पहनने का खास मौका होता है, शुरू हुआ पांच दिनों की दुर्गा पूजा का समापन 21 अक्टूबर को विजया दशमी के साथ होगा, जब भक्त देवी दुर्गा को विदा करेंगे।