Dussehra: जम्मू में दशहरा से पहले रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के ऊंचे पुतलों को जीवंत रूप देने के लिए बांस के ढांचों पर कागज और कपड़े की परतें चढ़ाई जा रही हैं। इन पुतलों को बनाने वाले कारीगर हर साल उत्तर प्रदेश से आते हैं और उनमें से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से हैं।
वे हफ्तों तक कड़ी मेहनत करते हैं और अक्सर देर रात तक काम करते हैं ताकि दशहरे की शाम को जलाए जाने पुतलों को वक्त पर पूरी तरह तैयार कर सकें। इनमें हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के कारीगर शामिल हैं। कई कारीगरों ने तो दशकों से एक-साथ काम किया है।
इन कारीगरों के बीच का रिश्ता सिर्फ साथ मिलकर काम करने या रोजी-रोटी तक ही सीमित नहीं है। इनमें से कई एक ही गांव से हैं। वे न सिर्फ साथ मिलकर खाना खाते हैं, बल्कि दुख-सुख में एक-दूसरे का साथ भी देते हैं और त्योहारों पर भी साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं।
हर साल की तरह, कारीगर दशहरे से पहले पुतले तैयार करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। तैयार होने पर इन पुतलों को न सिर्फ जम्मू की अलग-अलग जगहों पर, बल्कि इस इलाके के कई दूसरे कस्बों और शहरों में भी भेजा जाएगा।