Durga Puja: देश भर में जोर-शोर से चल रही है दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारी

Durga Puja: रोशनी, सजावट और भीड़-भाड़ वाले पंडालों से पहले, देश भर की कार्यशालाओं में दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारी शुरू हो जाती है। ठीक वैसे ही जैसे जम्मू की इस कार्यशाला में होती है। यहां कारीगर हाथों से मिट्टी को गूथते और प्रतिमाओं को गढ़ते दिखते हैं। ये घंटों की मेहनत और बेहद सब्र के साथ किया जाने वाला काम है। सिलीगुड़ी के कारीगर हर साल जम्मू पहुंचते हैं और प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए ये अस्थायी कार्यशाला लगाते हैं, जहां त्योहार से पहले देवी की प्रतिमाएं धीरे-धीरे आकार लेती हैं।

हर प्रतिमा हाथ से बनाई जाती है, जिसमें कारीगर अपना हुनर और बारीकियों को जोड़ते हैं। यहां कारीगर प्रतिमाओं को बनाने के लिए इलाके से ही मिट्टी लाते हैं और उसे गेहूं की भूसी के साथ मिलाकर अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रतिमाएं गढ़ते हैं। वे अंतिम रूप देने से पहले सतह को चिकना करने के लिए उस पर पुट्टी भी लगाते हैं।

कई ग्राहक दुर्गा पूजा उत्सव से कुछ दिन पहले तो कई लोग हफ्तों पहले ही अपनी पसंदीदा प्रतिमाएं चुनने के लिए पहुंचने लगते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में भी बंगाल से जुड़ाव देखने को मिलता है। यहां, कोलकाता में यह हुनर सीखने वाले कारीगर एक दशक से भी ज्यादा समय से हर साल आते रहे हैं। वे मिट्टी से ऐसी प्रतिमाएं बनाते हैं जो पूरे इलाके के पूजा पंडालों तक पहुंचती हैं।

कारीगरों का कहना है कि  “ये मूर्तियां हमारे तो काफी दूर तक जाती हैं। बाकी हम सीखे तो कोलकाता के एके चक्रवती से वो हमारे गुरु हैं और उन्हीं से हमने ये प्रेरणा ली है। और हमें मूर्तियां बनाते हुए 10-11 साल हो गए हैं। मिट्टी की बनाते हैं मूर्तियां। हमारी मूर्तियां जाती हैं आगरा, जालौन, अजीतमल , इटावा समेत बहुत दूर-दूर तक जाती हैं। मोटरसाइकिल से ले जाते हैं।”

मिट्टी का काम पूरा होने के बाद, प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने से पहले उन्हें रंगा जाता है और शानदार साड़ियों, गहनों और दूसरी सजावटी चीजों से सजाया जाता है। इस साल दुर्गा पूजा उत्सव की शुरूआत 16 अक्टूबर से होगी। ऐसे में ये प्रतिमाएं जल्द ही कार्यशाला से ​​निकलकर अलग-अलग राज्यों में त्योहार के जश्न के लिए तैयार हो रहे पंडालों और घरों तक पहुंचेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *