Varanasi: उत्तर प्रदेश में वाराणसी के घाटों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है, क्योंकि पितृ पक्ष के दौरान हजारों लोग अपने पितरों के पिंडदान और तर्पण के अनुष्ठान के लिए इस पवित्र शहर में आ रहे हैं। पिशाच मोचन कुंड पर परिवार तर्पण यानी काले तिल, कुश और जौ के साथ जल अर्पित करने जैसे अनुष्ठान कर अपने दिवंगत पितरों की आत्माओं की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
मान्यता है कि वाराणसी में पिंडदान, तर्पण और पूजा-अनुष्ठान करने से मृत आत्माओं को मोक्ष यानी मुक्ति पाने में मदद मिलती है। ये अनुष्ठान आमतौर पर श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान से शुरू होते हैं, जिसके बाद पिंडदान किया जाता है। इसमें मृत पितरों को ‘पिंड’ यानी चावल के गोले अर्पित किए जाते हैं, जिसे उनके भौतिक शरीर का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि पिंडदान से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और उन्हें शांति मिलती है। इस साल पितृ पक्ष 26 सितंबर से पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ शुरू हुआ था, जबकि मुख्य और औपचारिक प्रतिपदा श्राद्ध की शुरुआत 27 सितंबर से हुई, इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।