Haridwar: पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए आज से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है, पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धर्मनगरी हरिद्वार में भी पितृ कर्म के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। हरिद्वार मायापुर स्थित प्रसिद्ध प्राचीन नारायणी शिला मंदिर में देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और विधि-विधान के साथ अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान कर रहे हैं।
मान्यता है कि नारायणी शिला पर पितृ कर्म करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृ पक्ष के दौरान यहां नारायण बलि सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी कराए जाते हैं। आने वाले दिनों में नारायणी शिला पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
धर्मनगरी हरिद्वार में पितृ पक्ष के शुरू होते ही नारायणी शिला मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर यहां पहुंच रहे हैं।नारायणी शिला पर श्रद्धालु पंडितों की देखरेख में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। पितृ पक्ष में अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
नारायणी शिला मंदिर को हरिद्वार के प्रमुख पितृ तीर्थों में माना जाता है। यहां पितृ कर्म के साथ नारायण बलि सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी कराए जाते हैं। मान्यता के अनुसार इन अनुष्ठानों के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
पितृ पक्ष के दौरान हरिद्वार में नारायणी शिला के अलावा गंगा घाटों पर भी श्रद्धालु तर्पण और पिंडदान करते नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां गंगा के पावन तट पर पितृ कर्म करने से उन्हें आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है।
पितृ पक्ष के दौरान देशभर से श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने का सिलसिला जारी है। नारायणी शिला मंदिर में भी श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए लोग यहां धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।