Delhi News: डीटीसी यानी दिल्ली परिवहन निगम की बसें ज्यादातर राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों से नदारद रहीं क्योंकि बड़ी संख्या में चालकों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। इससे बस से सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे चालकों में से ज्यादातर इलेक्ट्रिक बसें चलाते हैं। वे दैनिक वेतन में बढ़ोतरी, अपने परिवारों के लिए चिकित्सा सुविधाओं और ओवरटाइम भुगतान की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि उनकी मौजूदा कमाई से घर के बुनियादी खर्च भी पूरे नहीं हो पाते हैं। चालक डेंट, पेंट या दुर्घटना से बस को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपनी कमाई से की जाने वाली कटौती का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन कटौतियों से उनकी पहले से ही सीमित आय और कम हो जाती है। कई रूटों पर कम बसें चलने की वजह से, शहर भर में यात्रियों को बस स्टॉप पर ज्यादा देर तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कई यात्रियों ने बताया कि उन्होंने मेट्रो और परिवहन के दूसरे साधनों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिससे उनके सफर में लगने वाला समय और खर्च, दोनों बढ़ गए हैं। वहीं दिव्यांग यात्रियों का कहना है कि इस हड़ताल की वजह से उनका रोजाना का सफर और भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि उनके लिए भीड़-भाड़ वाली मेट्रो ट्रेनों में चढ़ पाना मुमकिन नहीं है।
उनका ये भी कहना है कि हालात को देखते हुए ऑटो-रिक्शा चालक यात्रियों से ज्यादा किराया वसूलने लगे हैं। दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने गुरुवार को प्रदर्शन कर रहे चालकों से अपनी हड़ताल खत्म करके काम पर लौटने की अपील की और कहा कि उनकी ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं। सरकार ने कहा कि सिर्फ वेतन बढ़ोतरी से जुड़ा मुद्दा बाकी है और श्रम विभाग से विचार-विमर्श के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। मौजूदा वक्त में दिल्ली में लगभग 6,500 डीटीसी बसें हैं, जिनमें रोजाना कुल मिलाकर करीब 60 लाख यात्री सफर करते हैं।