Golden Temple: अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां ‘गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश’ का उत्सव मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर पहुंचे। करीब चार सौ साल पुरानी परंपरा के तहत लोग यहां प्रार्थना कर रहे हैं और गुरु का आशीर्वाद ले रहे हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज का कहना है कि “आज, 1604 ईस्वी में भादो महीने के सातवें दिन, श्री दरबार साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब महाराज का पहला प्रकाश किया गया।
जैसा कि हम सभी जानते हैं, पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज ने भाई गुरदास जी के माध्यम से रामसर सरोवर के किनारे स्थित गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में आदि ग्रंथ का पहला स्वरूप तैयार करवाया था। जब यह पवित्र स्वरूप तैयार हो गया, तो गुरु अर्जन देव जी महाराज पूरी संगत के साथ श्री दरबार साहिब आए। 1604 ईस्वी में, इसी दिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश हुआ था।”
समारोह के कारण स्वर्ण मंदिर परिसर का नजारा बेहद खूबसूरत हो गया है। श्री हरिमंदिर साहिब और आसपास के पूरे इलाके को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। फूलों की शानदार सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि “आज गुरु साहिब जी का प्रकाश गुरुपर्व है। इस शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई। इस मौके पर श्री हरमंदिर साहिब को बहुत खूबसूरती से सजाया गया है। गुरु राम दास जी के पवित्र परिसर को फूलों से सजाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं के लिए एक सुंदर और मनमोहक नजारा बन गया है। शाम को पारंपरिक देसी घी के दीये जलाकर जश्न को और खास बनाया जाएगा। गुरु साहिब जी के आशीर्वाद से, श्रद्धालु पवित्र स्थल के जगमगाते और मनमोहक दृश्य के दर्शन कर सकेंगे।”
“बहुत अच्छा गुरुद्वारा सजाया गया है। हर साल ही बहुत अच्छा होता है लेकिन इस साल तो और भी अच्छा है। इतने अच्छे-अच्छे फूल सजाया गया है। इतनी ज्यादा भीड़ है, लोग इतनी दूर-दूर से आए हैं। लॉंग वीकेंड है तो एक आनंद ही अलग आ जाता है। दरबार साहेब की नगरी में आकर तो एक अलग ही लगता है आकर।”
यह दिन 1604 की एक ऐतिहासिक घटना की याद में मनाया जाता है। इसी साल सिखों के पवित्र ग्रंथ ‘आदि ग्रंथ’ को पहली बार अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया था।