Delhi: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने से मारे गए छात्रों के शव अंतिम संस्कार के लिए उनके घर लाए जा रहे हैं, लाडलों को खोने से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मध्य प्रदेश के कटनी के रहने वाले अक्षत यादव, प्रशासनिक सेवा में करियर बनाने का सपना लेकर दिल्ली आए थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन अक्षत की जिंदगी किसी इमारत के ढहने से मलबे के नीचे दबकर खत्म हो जाएगी।
पीजी वाली इमारत गिरने की खबर सुनकर अक्षत के पिता तुरंत दिल्ली पहुंचे..और फिर उन्हें यहां वो बेहद दुखद खबर मिली जिसे कोई पिता सुनना नहीं चाहेगा। अक्षत के स्कूल के शिक्षक और पड़ोसी बताते हैं कि उसके सपने बड़े-बड़े थे और उसमें उन्हें सच साबित करने की बहुत काबिलियत थी। वे अब भी उसके जाने के गम से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले और अंडरग्रेजुएट कोर्स के दूसरे साल के छात्र अर्पित जाज का परिवार भी बुरी तरह टूट गया है, अर्पित अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन मनाने के बाद, हादसे के दिन ही रविवार को दिल्ली पहुंचा था। दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद परिवार का उससे संपर्क टूट गया और सोमवार को उसकी मौत की पुष्टि हुई।
हादसे में अर्पित की एक आंख खराब हो गई थी, लेकिन दूसरी आंख ठीक रही। उसके परिवार ने किसी जरूरतमंद की मदद करने की उम्मीद में उसे दान करने का फैसला किया है। 17 साल का पवन दिल्ली के एक कॉलेज में कंप्यूटर साइंस में बी. एससी कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के औरैया का रहने वाला यह युवा छात्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी चार बहनें थीं।
परिवार को उम्मीद थी कि पवन उन्हें उनकी साधारण आर्थिक स्थिति से बाहर निकालने में मदद करेगा। अब वे उसके जाने के गम से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के रहने वाले अभिषेक के परिवार ने मंगलवार को वाराणसी में उनका अंतिम संस्कार किया। उनके भाई अधिकारियों से उन कमियों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं जिनकी वजह से यह हादसा हुआ।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के पेइंग गेस्ट आवास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इमारत रविवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई। मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई।
इस हादसे ने कमजोर इमारतों को लेकर एमसीडी यानी दिल्ली नगर निगम के मानसून से पहले कराए जाने वाले सालाना सर्वे की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में एमसीडी ने लगभग 28 लाख इमारतों का सर्वे किया था, जिसमें सिर्फ 19 इमारतें खतरनाक पाई गई थीं।