Congress: कांग्रेस कार्य समिति ने ‘वंदे मातरम्’ पर अपनी सबसे बड़ी फैसला लेने वाली संस्था के 1937 के प्रस्ताव को मानने का फैसला किया। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ दो पद ही गाए जाएंगे।
कांग्रेस का ये फैसला तब आया जब बीजेपी ने उसके नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण न गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया था। सीडब्ल्यूसी की चार घंटे से ज्यादा चली बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है और वे 1937 में अपनी शीर्ष नेताओं के फैसले के साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा, “इसमें कोई भ्रम नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कल गोवा में भी इस बारे में साफ कहा था। आज सीडब्ल्यूसी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। 1937 में जो प्रस्ताव पारित हुआ था, उस समय पार्टी के शीर्ष नेता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल मौजूद थे।”
उन्होंने कहा, “उस समय हमारे नेताओं ने जो फैसला लिया था, हम उसी फैसले पर कायम हैं। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी उसी फैसले के अनुसार काम करेंगे। यही हमारा निर्णय है।” ये पूछे जाने पर कि क्या पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो पद ही गाए जाएंगे, उन्होंने कहा, “हां, पहले दो पद।” वेणुगोपाल ने कहा कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान का गायन कांग्रेस के लिए भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है, जबकि बीजेपी के लिए ये एक राजनीतिक मुद्दा है।