AI: मौजूदा दौर में इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, एआई की पहुंच भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में साइबर क्राइम का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो साल में भारत में साइबर सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आई है। ये साइबर क्राइम में इजाफा और उनका पता लगाने की बढ़ती क्षमता, दोनों को दिखाता है।
जानकारों का कहना है कि ये ट्रेंड बदलते डिजिटल माहौल का हिस्सा है और जैसे-जैसे डिजिटल गतिविधियां बढ़ेंगी, ये ट्रेंड भी जारी रह सकते हैं। गुजरते वक्त के साथ साइबर क्राइम का तरीका भी बदला है और इससे जुड़ी घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
जानकार बताते हैं कि इन बढ़ते खतरों से निपटने का सही तरीका है – सिस्टम को अपडेट रखना, खतरों को जल्द पहचानने की क्षमता को मजबूत करना और कमियों को जल्द से जल्द ठीक करना। साइबर सुरक्षा के लिए काम करने वाली सरकारी एजेंसी सीईआरटी-इन यानी भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम ने भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें संगठनों को निर्देश दिया गया है कि किसी कमी का पता चलते ही वे तुरंत कार्रवाई करें और संभावित खतरे से बचें।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में भारत में साइबर सुरक्षा से जुड़ी 29,44,248 घटनाओं की रिपोर्ट की गई और उन्हें ट्रैक किया गया। ये संख्या 2023 में दर्ज की गई 15,92,917 घटनाओं की तुलना में लगभग 85 प्रतिशत ज्यादा है, जो देश के सामने साइबर सुरक्षा की बढ़ती चुनौती को दिखाता है।