Indian rupee: BMI की चौकने वाली रिपोर्ट, अगले साल मार्च तक 97 प्रति डॉलर तक गिर सकता है रुपया

Indian rupee: भारतीय रुपया अगले दो वित्त वर्षों में और कमजोर होकर 99 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। ऊंची ऊर्जा कीमतों, वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और ब्याज दरों में कम अनुकूल अंतर से रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है। एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। हालांकि, फिच सॉल्यूशंस की कंपनी बीएमआई ने कहा कि विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकार के हालिया कदम गिरावट की रफ्तार को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

बीएमआई की रिपोर्ट कहती है कि रुपया वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक कमजोर होकर 97 प्रति डॉलर और वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक 99 रुपये प्रति डॉलर तक गिर सकता है। फिलहाल यह 95.4 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर है। शोध फर्म ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपया करीब चार प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऊंची ऊर्जा कीमतों और वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और डॉलर की मांग बढ़ेगी। बीएमआई ने कहा, ‘‘अमेरिका-ईरान संघर्ष रुपये पर असर डालेगा। हालांकि, हाल के सरकारी उपाय विदेशी मुद्रा प्रवाह को समर्थन देंगे और गिरावट की सीमा को सीमित करने में मदद करेंगे। उम्मीद है कि संघर्ष का स्थायी समाधान हो जाएगा, जिससे वित्त वर्ष के बाद के हिस्से में कुछ दबाव कम होगा।’’

भारत और अमेरिका के बीच नीतिगत ब्याज दरों का अंतर भी रुपये के लिए कम अनुकूल होता जा रहा है। बीएमआई को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व साल 2026 के शेष हिस्से में नीतिगत दर 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखेगा और अगले साल इसमें 0.50 प्रतिशत अंक की कटौती करेगा। वहीं, भारत में उसे फरवरी, 2027 में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि की उम्मीद है। संभावित जलवायु स्थिति ‘सुपर अल नीनो’ भी रुपये के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इससे कृषि निर्यात घटने और खाद्य आयात की मांग बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार होने से कुछ सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। बीएमआई ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कॉल सेंटर जैसी सेवा गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका भी निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है। मजबूत सेवा अधिशेष निकट अवधि में भारत के बाहरी खाते को समर्थन देता रहेगा। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया उपायों में विदेशी निवेशकों के लिए कर कटौती, भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश की पहुंच बढ़ाना और रियायती विदेशी मुद्रा हेजिंग सुविधाएं शामिल हैं।

इन उपायों से करीब 40 अरब डॉलर का विदेशी पोर्टफोलियो निवेश आया है। भारत का बड़ा सेवा अधिशेष और विदेशों से होने वाला धनप्रेषण भी रुपये को समर्थन देगा। धनप्रेषण फिलहाल वस्तु व्यापार घाटे के करीब आधे के बराबर है और इससे चालू खाते के घाटे को सीमित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही, बीएमआई ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ने या लंबे खिंचने को रुपये के अनुमान के लिए प्रमुख नकारात्मक जोखिम बताया। इससे तेल कीमतें बढ़ने और वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति तेज होने की आशंका है। भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से ऊंचे शुल्क लगाए जाने का जोखिम भी है, जिससे निर्यात और निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।

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