Gandhinagar: गुजरात गांधीनगर ने पूरे किए 61 साल, बना योजनाबद्ध शहरी विकास की मिसाल

Gandhinagar: गुजरात का गांधीनगर सिर्फ़ एक राजधानी नहीं, बल्कि दूरदृष्टि और योजनाबद्ध विकास की पहचान है। महात्मा मंदिर, गिफ्ट सिटी और अनेक राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस शहर को नई पहचान दी है। 61 साल पहले गुजरात की नई राजधानी के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज सुशासन, आधुनिक विकास और बेहतर अर्बन प्लानिंग की मिसाल बन चुकी है।

2 अगस्त 1965 को गांधीनगर के निर्माण का शिलान्यास किया गया और मात्र पांच वर्षों में शहर का पहला चरण तैयार हो गया। इस शहर को विदेशी विशेषज्ञों के बजाय भारतीय आर्किटेक्ट एच.के. मेवाड़ा और प्रकाश एम. आप्टे ने डिज़ाइन किया। एक किलोमीटर के सेक्टर ग्रिड मॉडल पर बसाए गए गांधीनगर को शुरुआत में 30 सेक्टरों में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। प्रत्येक सेक्टर में आवासीय क्षेत्र, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, बगीचे और स्थानीय बाज़ार जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया।

आज करीब 326 वर्ग किलोमीटर में फैला गांधीनगर सिर्फ़ प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि शिक्षा, टेक्नोलॉजी, अनुसंधान और आधुनिक विकास का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। विधानसभा, सचिवालय, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निवास के अलावा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, IIT गांधीनगर और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज गांधीनगर जैसे बेहतरीन शैक्षणिक संस्थानों ने भी शहर की पहचान को नई दिशा दी है। चौड़ी सड़कें, हरियाली, स्वच्छ वातावरण और सुव्यवस्थित सेक्टर योजना के कारण गांधीनगर देश के प्रमुख प्लान्ड शहरों में अपनी अलग पहचान रखता है।

61 वर्षों में गांधीनगर ने सिर्फ़ अपना विस्तार नहीं किया, बल्कि विकास की एक नई तस्वीर भी गढ़ी है। आज यह शहर हरियाली, सुव्यवस्थित प्लानिंग और आधुनिक सुविधाओं के साथ गुजरात की प्रगति का मज़बूत प्रतीक बन चुका है।

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