Raksha Bandhan: उत्तराखंड के रामनगर की ऐपण कलाकार रंजना नेगी कुमाऊं की पारंपरिक कला को बढ़ावा देते हुए त्योहारों के लिए अलग-अलग चीजें बनाती हैं। ऐपण कला जमीन या दीवार पर बनाए जाने वाले अनोखे ज्यामितीय पैटर्न के लिए जानी जाती है।
इस साल, रंजना ने रक्षाबंधन के लिए राखियां बनाने में ऐपण कला के साथ कुमाऊंनी शब्दों का भी इस्तेमाल किया है।
ऐपण कलाकार रंजना नेगी ने बताया कि “रक्षाबंधन आने वाला है और मैं सोच रही थी कि क्या किया जाए। ऐपण आर्ट तो मैं बनाती ही हूं, तो राखी को लेकर भी मेरे मन में आया कि क्यों ना हमारी कुमाऊं की संस्कृति को लोगों से जोड़ा जाए। मार्केट से रेडीमेड राखियां तो हर बार लोग पहनते ही हैं इसमें थोड़ा यूनीक ये है कि एक तो ये हैंडमेड है और डिस्पोज भी बहुत जल्दी हो जाती है, इसमें कुमाऊं के कुछ शब्द भी आते हैं जैसे हमारे यहां बड़े भाई को ‘दाजू’ या ‘दादा’ कहते हैं, छोटे भाई को ‘भुला’, मम्मी को ‘इज्जा’ और पिताजी को ‘बाबू’ बोलते हैं, तो इस टाइप के शब्द भी इन राखियों पर आए हुए हैं।”))
ये हाथ से बनी राखियां उन ग्राहकों को ज्यादा आकर्षित कर रही हैं जो बाजार में मिलने वाली आम राखियों के मुकाबले आधुनिक डिजाइन के साथ पारंपरिक पहचान की तलाश में हैं। रामनगर की रंजना की पहल की बदौलत उनकी खूबसूरत राखियों के चर्चे आज देश ही नहीं, विदेश में भी हैं। इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।