Uttarakhand: सरकारी रिकॉर्ड में नामों की वर्तनी या जानकारी में गलतियों की वजह से पूरे उत्तराखंड में हजारों लोग विशेष गहन पुनरीक्षण केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। देहरादून का रायपुर एसआईआर सेंटर भी ऐसा ही एक केंद्र है, जहां लोग अपने चुनावी रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों को ठीक करवाने की उम्मीद में कागजों के बंडल लिए लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
आम समस्याओं में नामों की वर्तनी में अंतर और अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में परिवार की जानकारी का मेल न खाना शामिल है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर विवादित मामले मतदाता या परिवार के किसी सदस्य के नाम में अंतर से जुड़े हैं, जो अक्सर रिकॉर्ड के डिजिटल होने से पहले उनमें हुई गलतियों की वजह से होता है।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ असली मतदाताओं के सामने एक और चुनौती यह है कि वे जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पाते, क्योंकि वे बाढ़, आग या किसी और हादसे में गुम हो चुके हैं। ऐसे मामलों में, आवेदकों से कहा जा रहा है कि वे किसी भी उपलब्ध सहायक दस्तावेज को सत्यापन के लिए जमा करें।
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, पूरे राज्य में 19 लाख से ज्यादा गड़बड़ियां पाई गई हैं, जबकि लगभग साढ़े पांच लाख मतदाताओं को नोटिस जारी करके उनसे सत्यापन के लिए दस्तावेज मांगे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुनवाई तीन सितंबर तक जारी रहेगी।
इस बीच, कांग्रेस ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कुछ मामलों में मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति जताने वाले लोग फर्जी हैं, जिनका असल में कोई अस्तित्व ही नहीं है। बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी ने लगातार ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया का विरोध किया है।
उसने यह भी कहा कि जिन लोगों को आपत्तियों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें कोई भी फैसला लेने से पहले अपील करने और दस्तावेज जमा करने का मौका दिया जा रहा है। इस विशेष गहन पुनरीक्षण का मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना और साफ-सुथरा बनाना है। इसमें योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और डुप्लीकेट, मृतक, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके या किसी और वजह से अयोग्य लोगों के नाम हटाए जाएंगे।
चुनाव अधिकारियों ने फिर से साफ किया है कि नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले हर व्यक्ति को दस्तावेज जमा करने और अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है।