Paper leak Bill: लोकसभा से लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पारित हो गया है, जितेंद्र सिंह के बयान के दौरान सदन में हंगामा के आसार बन रहे थे, इस दौरान ही स्पीकर ने विधेयक पारित कर दिया। सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने इस विधेयक को मंजूरी दिलाई। अब यह बिल आगे की प्रक्रिया के लिए राज्यसभा में भेजा जाएगा।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह संशोधन देशभर में होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक माफिया, संगठित परीक्षा गिरोहों और तकनीकी माध्यमों से होने वाली परीक्षा धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
बिल के प्रावधान-
संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी संगठित अपराधों के खिलाफ पहले से अधिक कड़े प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर 10 वर्ष तक की सजा।
- दोषी संस्थाओं या संगठनों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना।
- डिजिटल हैकिंग, सर्वर में सेंधमारी और प्रश्नपत्र की अवैध ऑनलाइन साझेदारी को भी कानून के दायरे में लाना।
- परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय करना।
- मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक व्यवस्था को बढ़ावा देना।
सदन में हुआ जोरदार हंगामा
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा और विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग भी उठाई। इसके बावजूद सरकार ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित करा लिया।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कानून?
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर डाला है। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से ईमानदार अभ्यर्थियों का विश्वास बढ़ेगा, परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
अब आगे क्या?
लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो सकेगा।