Paper Leak Bill: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने असम में आई बाढ़ और उसमें 70 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग भी उठाई।पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बोलते हुए गोगोई ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है और यह विधेयक केवल दिखावा करने के लिए लाया गया है। गोगोई ने कहा कि सरकार का यह कदम सिर्फ एक आंखों में धूल झोंकने जैसा प्रयास है। इस विधेयक से परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार नहीं होगा और सरकार को इस मुद्दे पर ठोस तथा प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के नीट पेपर लीक मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए 46 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया 11 महीने तक फरार रहा और गिरफ्तारी के बाद उसे भी जमानत मिल गई। इसके अलावा अमित कुमार बरुआ और अमित कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों को भी जमानत मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कई आरोपियों के नाम गिनाए।
गौरव गोगोई ने कहा कि जिस उद्देश्य से पहले यह कानून लाया गया था, उसमें वह सफल नहीं हो सका और जिस मंशा के साथ अब संशोधन लाया जा रहा है, उसमें भी सफलता की संभावना नहीं दिखती। उन्होंने कहा “यह कानून आपकी विफलता का स्मारक है।” गौरव गोगोई ने कहा कि कानून उस समय भी विफल था। आज जिस मंशा से सरकार ये ला रही है, आज भी यह फेल होगा। 2024 में कानून लाने के बावजूद 2026 में भी पेपर लीक हुआ। अफसोस की बात है कि उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। तब उन्होंने कहा था “कहां हुआ पेपर लीक, नहीं हुआ पेपर लीक।’ इस बार भी उनका यही रवैया था। 21 बच्चों ने आत्महत्या कर दी। इस्तीफे के बाद कल प्रधान जब संसद में आए तो आपने उनको ऐसे माला पहनाई जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़के आए हों।
उन्होंने कहा कि व्यापक चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री युवाओं से इंस्टाग्राम पर अधिक ध्यान देने की बात करते हैं। गौरव गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाई पावर कमेटी के गठन की बात की, लेकिन दो वर्ष पहले गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यदि समिति ने इतना अच्छा काम किया था, तो फिर दो साल बाद पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों हुईं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह इस मुद्दे पर गंभीर है। गोगोई ने कहा कि सरकार ने एनटीए के 47 लोगों को बदले जाने की बात कही है, लेकिन वह जानना चाहते हैं कि ये 47 लोग कौन हैं। उन्होंने कहा कि एनटीए में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है और इनमें भी 10 से 12 पद खाली हैं, ऐसे में 47 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा कैसे किया जा रहा है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि एनटीए के महानिदेशक (डीजी) को बदल दिया गया, लेकिन चेयरमैन को पद पर बनाए रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि चेयरमैन पर इतना भरोसा क्यों जताया जा रहा है। उन्होंने चेयरमैन के पिछले कार्यकाल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां कथित तौर पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
इसके साथ ही कहा कि आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम है। आप चाहते हैं कि शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोग आपके संगठन के सदस्य बने। डीयू, IIT, जेएनयू ने अपने स्टूडेंट्स ने कहा कि प्रदर्शन में मता जाओ। क्या ऐसे हम आने वाले भारत का निर्माण करेंगे। राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि प्रधान सिर्फ एक मुखौटा हैं। उनके हटने से भी शिक्षा में सुधार आएगा, इसका विश्वास न हमें है, न बच्चों को। बच्चे क्या करें। उनके पास पैसे नहीं है कि 30-30 लाख में पैसे खरीद सकें। वे नाराज हैं। जब वे लड़ नहीं पाते तो आत्महत्या कर लेतें हैं।
गौरव गोगोई ने कहा कि छात्र आंदोलन ने यह दिखा दिया कि लोगों के मन से डर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की रात 10 बजे भी लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और लोकतंत्र के समर्थन में खड़े रहे। उन्होंने कहा कि खून से लथपथ चेहरा होने के बावजूद एक छात्र पुलिस के सामने डटा रहा और लोगों को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराया।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के दौरान कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि उन भावनाओं को भी याद रखना चाहिए, जिन्हें छात्रों ने सामने रखा। इस दौरान उन्होंने शायर वसीम बरेलवी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा, “उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।” गोगोई ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक युवक ने आगे आकर एक लड़की को बचाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि एक छात्र ने कहा था कि जिस उंगली से उसने कमल के निशान पर वोट दिया था, उसी उंगली को आज पुलिस ने तोड़ दिया।
उन्होंने देशभर के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के लिए स्विगी के माध्यम से भोजन भेजा और वकीलों ने भी लोकतंत्र के समर्थन में उनका साथ दिया। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, एक पुलिसकर्मी ने एक लड़की को थप्पड़ मारा और एक बच्ची के निजी अंग पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं जाएगा और इस पूरे मामले में गृह मंत्री से जवाब मांगा। गौरव गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक इसलिए लेकर आई है क्योंकि उसकी पुलिस छात्र आंदोलन को दबाने में सफल नहीं हो सकी। उन्होंने बिहार में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा एके-47 के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया