Life Insurance: प्राइवेट कंपनियों के दम पर लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम में 16.6% का उछाल

Life Insurance: केयरएज रेटिंग्स BFSI की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने FY27 की शुरुआत मज़बूती से की है। अप्रैल-जून तिमाही में नए बिज़नेस प्रीमियम NBP में साल-दर-साल 16.6% की बढ़ोतरी हुई है। यह ग्रोथ प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन, रिटेल प्रोडक्ट्स की लगातार मांग और ग्रुप बिज़नेस में सुधार की वजह से हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि Q1FY27 में सेक्टर का नया बिज़नेस प्रीमियम 1.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों ने पूरे मार्केट से बेहतर प्रदर्शन जारी रखा और अपना मार्केट शेयर बढ़ाकर लगभग 40% कर लिया।

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत के लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने FY27 की मज़बूत शुरुआत की है। Q1FY27 में नए बिज़नेस प्रीमियम NBP में साल-दर-साल  16.6% की बढ़ोतरी हुई है, जो रिटेल और ग्रुप दोनों सेगमेंट में लगातार मांग को दिखाता है।” इसमें आगे कहा गया कि “ग्रोथ मुख्य रूप से प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की वजह से हुई, जिनके प्रीमियम कलेक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई। इसे रिटेल प्रोडक्ट्स में लगातार मांग और ग्रुप बिज़नेस में सुधार का सहारा मिला।”

महीने के आधार पर देखें तो, एक साल पहले के कम बेस के बाद जून में सेक्टर में फिर से ग्रोथ देखी गई। नए बिज़नेस प्रीमियम साल-दर-साल 13.1% बढ़कर 46,490.5 करोड़ रुपये हो गए, जबकि पिछले साल जून में 3.1% की गिरावट दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों ने इस सुधार की अगुवाई की। जून में उनके प्रीमियम कलेक्शन में साल-दर-साल 36.8% की बढ़ोतरी हुई, जबकि LIC के मामले में यह बढ़ोतरी मामूली 1.2% रही।

नतीजतन, सेक्टर के नए बिज़नेस प्रीमियम में प्राइवेट सेक्टर का हिस्सा एक साल पहले के 36.5% से बढ़कर लगभग 40% हो गया, हालांकि मार्केट में LIC का हिस्सा अभी भी लगभग 60% बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रुप बिज़नेस में तेज़ी से सुधार और रिटेल प्रोटेक्शन व लॉन्ग-टर्म सेविंग्स प्रोडक्ट्स में लगातार मज़बूती से इस सुधार को बल मिला।

आगे देखते हुए, CareEdge को उम्मीद है कि प्रीमियम ग्रोथ को डिजिटल और अलग-अलग तरह के डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों के विस्तार, प्रोटेक्शन और एन्युइटी प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग और ग्रुप बिज़नेस में धीरे-धीरे हो रहे सुधार से सहारा मिलता रहेगा। हालांकि, इसमें चेतावनी दी गई है कि बैंकाश्योरेंस से जुड़े किसी भी रेगुलेटरी बदलाव के कारण बीमा कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों में और विविधता ला सकती हैं।

 

 

 

 

 

 

 

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