Maharashtra: पुणे की विशेष अदालत ने नासरापुर दुष्कर्म-मर्डर मामले में 65 वर्षीय दोषी को सुनाई फांसी की सजा

Maharashtra:पुणे की एक विशेष अदालत ने सोमवार को नासरापुर दुष्कर्म और हत्या मामले में 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इस जघन्य अपराध को “अत्यंत क्रूर और दुर्लभतम श्रेणी” का बताते हुए कहा कि मामले की गंभीरता और अपराध के पीछे की मानसिकता को देखते हुए मृत्युदंड उचित है।

यह घटना 1 मई को पुणे जिले के नासरापुर गांव में हुई थी, जहां तीन वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में की गई।

25 जून को अदालत ने भीमराव कांबले को दोषी करार देते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दोषी है।

दोषसिद्धि के बाद मामले की सुनवाई सजा निर्धारण चरण में पहुंची। अभियोजन पक्ष और पीड़ित पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतिम फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रख लिया था।

विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता अजय मिसार ने कहा कि पूरे मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को केंद्र में रखा। उन्होंने बताया कि अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ सभी आरोप पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध हुए हैं।

अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड की मांग को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 12 महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया, जिनमें नाबालिगों के खिलाफ जघन्य अपराधों में कठोरतम सजा और मृत्युदंड की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई है। अदालत ने इन तर्कों से सहमति जताई।

अंततः सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने भीमराव कांबले को तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के अपराध में फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला राज्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों पर सख्त न्यायिक रुख का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

 

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