Gujarat: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात में ‘भारत टैक्सी सर्विस’ का शुभारंभ किया। यह देश की पहली ऐसी राइड-हेलिंग कैब सेवा है, जो सहकारी मॉडल ,ऑपरेटिव मॉडल पर आधारित है और जिसका स्वामित्व स्वयं ड्राइवरों के पास होगा। सरकार का दावा है कि यह पहल ड्राइवरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर और पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
गुजरात के 14 शहरों से हुई शुरुआत
फिलहाल ‘भारत टैक्सी सर्विस’ की शुरुआत गुजरात के 14 प्रमुख शहरों में की गई है। सहकारिता मंत्रालय की योजना अगले एक महीने के भीतर इस सेवा का विस्तार पूरे राज्य में करने की है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
क्यों महसूस हुई नई व्यवस्था की जरूरत?
लॉन्च कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ टैक्सी सेवाओं की मांग भी लगातार बढ़ी है। लेकिन निजी कैब कंपनियों के संचालन को लेकर यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की ओर से कई शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने बताया कि आम लोगों और ड्राइवरों ने उनसे मुलाकात कर निजी कंपनियों की कार्यप्रणाली, अधिक कमीशन, अनियमित किराए और अन्य समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सहकारी मॉडल पर आधारित एक नई व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया गया।
सिर्फ कानून नहीं, नया बिजनेस मॉडल भी जरूरी
अमित शाह ने कहा कि शुरुआत में यह विचार सामने आया था कि निजी कैब कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए नया कानून बनाया जाए। हालांकि उनका मानना है कि केवल कानून बनाकर हर समस्या का पूर्ण समाधान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास किया है, जिसमें व्यवस्था की बुनियाद ही ड्राइवर-केंद्रित हो। इससे किसी भी प्रकार के शोषण की संभावना कम होगी और लाभ का बड़ा हिस्सा सीधे सेवा देने वाले लोगों तक पहुंचेगा।
ड्राइवरों को क्या होगा फायदा?
‘भारत टैक्सी सर्विस’ की सबसे बड़ी खासियत इसका ड्राइवर-स्वामित्व मॉडल है। इस व्यवस्था में ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार भी होंगे। इससे—कमाई का बड़ा हिस्सा ड्राइवरों को मिलेगा। निजी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी। अत्यधिक कमीशन की समस्या कम हो सकती है। ड्राइवरों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ेगी। रोजगार और आय में स्थिरता आने की संभावना होगी।
कैब सेक्टर में आ सकता है बड़ा बदलाव
सरकार का मानना है कि सहकारिता मॉडल ने डेयरी, कृषि और बैंकिंग जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसी अनुभव के आधार पर अब इसे मोबिलिटी सेक्टर में लागू किया जा रहा है। यदि गुजरात में ‘भारत टैक्सी सर्विस’ का यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह देश के राइड-हेलिंग उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल ड्राइवरों को अधिक अधिकार और बेहतर आय मिलेगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, ‘भारत टैक्सी सर्विस’ भारतीय कैब उद्योग में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, जहां प्लेटफॉर्म का केंद्र निजी कंपनियां नहीं, बल्कि स्वयं ड्राइवर होंगे।